'जब तक जिंदा हूं, कोई आरक्षण को हाथ नहीं लगा सकता', किरोड़ी लाल मीणा ने भरी सभा में किया वादा

दौसा में विश्व आदिवासी दिवस पर मीणा हाई कोर्ट के आयोजन में कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने भी शिरकत की और एक बड़ा ऐलान किया.

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विश्व आदिवासी दिवस पर मीणा हाई कोर्ट में किरोड़ी लाल मीणा
IANS

राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने विश्व आदिवासी दिवस पर आरक्षण के बारे में अपने रूख को दोबारा स्पष्ट किया है. किरोड़ी मीणा ने दौसा के नांगल प्यारिवस में पंच अथाई में आयोजित एक आदिवासी महोत्सव में आरक्षण का समर्थन किया. रविवार (9 अगस्त) को नांगल प्यारीवास (दौसा) स्थित मीणा हाईकोर्ट में कार्यक्रम के दौरान डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि वो जब तक जीवित रहेंगे तब तक आरक्षण को खत्म नहीं किया जा सकता है. कार्यक्रम में डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने आरक्षण खत्म किए जा सकने की अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, "जब तक किरोड़ी के शरीर में जान है, कोई आरक्षण को छू भी नहीं सकता."

किरोड़ी लाल मीणा अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, जहां लोगों की भारी भीड़ ने उनका स्वागत किया. कार्यक्रम के दौरान मीणा के राजनीतिक जीवन और संघर्षों पर आधारित एक किताब भी लॉन्च की गई. किरोड़ी लाल मीणा ने अपने राजनीतिक सफ़र के बारे में बात करते हुए बताया कि उन्होंने लगभग 600 आंदोलनों में हिस्सा लिया है, 17 बार जेल गए हैं और 138 कानूनी मामलों का सामना किया है. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी.

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सुनाई मीणा हाई कोर्ट की कहानी

मीणा ने उन हालात का भी जिक्र किया जिनकी वजह से पंच अठाई को 'मीणा हाई कोर्ट' के नाम से जाना जाने लगा. उन्होंने पंचायत से जुड़े एक विवाद का जिक्र किया, जब लगभग 50,000 लोगों की भीड़ दौसा की ओर मार्च कर रही थी, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं.

मीणा के अनुसार जब भीड़ कई किलोमीटर आगे बढ़ गई, तो प्रशासन ने 14 गांव के बुज़ुर्गों या 'पंचों' को बुलाया और उन्हें भीड़ के हवाले कर दिया. उन्हें आज भी समझ नहीं आता कि प्रशासन ने ऐसा फैसला क्यों लिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता की शक्ति ही सर्वोपरि है और बताया कि इसी संघर्ष ने 'पंच अठाई' को 'मीणा हाई कोर्ट' की पहचान दिलाई.

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