राजस्थान के बीकानेर का पीबीएम हॉस्पिटल खास वजह से चर्चा में है. हॉस्पिटल में कैंसर के इंजेक्शन की कालाबाजारी का मामला सामने आया है. गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के इलाज के लिए आचार्य तुलसी रीजनल रिसर्च कैंसर इंस्टीट्यूट में इंजेक्शन सप्लाई किए गए थे. ये इंजेक्शन हॉस्पिटल की बजाय दिल्ली के बाजार में बरामद हुए हैं. इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. दिल्ली क्राइम ब्रांच की इंटरस्टेट सेल ने कार्रवाई करते हुए 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
बीकानेर के हॉस्पिटल में भेजे गए थे 4 इंजेक्शन
Bavencio 200 MG/10 ML यानी Avelumab इंजेक्शन भी शामिल बताए जा रहे हैं. एक इंजेक्शन की कीमत करीब एक लाख रुपये या उससे अधिक बताई जा रही है. 22 में से चार इंजेक्शन बीकानेर के लिए सरकारी सप्लाई में भेजे गए थे. जांच में सामने आया कि एक Bavencio वायल का बैच नंबर AU052510 है, जिसका मैन्युफैक्चरिंग फरवरी-2025 और एक्सपायरी की तारीख जनवरी-2028 है.
दिल्ली क्राइम ब्रांच में RMSCL के एमडी को भेजा नोटिस
सबसे बड़ा सवाल यही है कि मरीजों के इलाज के लिए भेजी गई सरकारी दवा आखिर दिल्ली के ब्लैक मार्केट तक पहुंची कैसे? दिल्ली क्राइम ब्रांच ने राजस्थान मेडिकल सर्विसेज़ कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) के एमडी पुखराज सैन को नोटिस भेजकर पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं.
आचार्य तुलसी रीजनल रिसर्च कैंसर इंस्टीट्यूट सवालों के घेरे में है.
रिकॉर्ड में हेराफेरी की आशंका
पुलिस को आशंका है कि सरकारी स्टॉक में फर्जी एंट्री या रिकॉर्ड में हेराफेरी कर दवाओं को बाहर निकालकर ब्लैक मार्केट में बेचा गया हो सकता है. फिलहाल जांच जारी है और बीकानेर से लेकर दिल्ली तक पूरे सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं. क्योंकि मामला सिर्फ महंगी दवाओं का नहीं है, बल्कि जीवनरक्षक दवाइयों का है.
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने तथ्यात्मक जांच के निर्देश दिए हैं. वहीं, गड़बड़ी की आशंका के बीच प्रिंसिपल डॉ सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि मामले में जांच के लिए कमिटी बनाई गई है. जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्यवाही की जाएगी.
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