20 साल बाद झारखंड में घर लौटा सुहाग, लापता होने के बाद पत्नी करती रही सिंदूर-करवा चौथ

राजस्थान के कुचामन सिटी से मिले मानसिक रूप से अस्वस्थ परशुराम 20 साल बाद अपने परिवार से मिले. पत्नी ने 20 वर्षों तक उनके लौटने की उम्मीद बनाए रखी थी.

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20 साल बाद झारखंड में घर लौटा सुहाग

"20 वर्षों तक मेरा पति एक दिन जरूर लौटेगा", इस विश्वास के साथ बैठी मालती देवी की प्रतीक्षा आखिरकार पूरी हो गई. अपना घर आश्रम, भरतपुर के प्रयासों से 20 साल से लापता परशुराम महतो आज अपने घर झारखंड के बोकारो लौट गए. मार्च 2024 में राजस्थान के कुचामन सिटी से मानसिक रूप से अस्वस्थ अवस्था में मिले एक व्यक्ति को अपना घर आश्रम लाया गया था. वह अपना नाम-पता कुछ नहीं बता पा रहे थे. आश्रम में उनका नाम प्रभुजी विष्णु रखकर उपचार शुरू किया गया. गंभीर बीमारी का ऑपरेशन भी कराया गया.

बोकारो के गोविंदपुर निवासी हैं परशुराम

धीरे-धीरे स्वास्थ्य सुधरने पर उन्होंने बताया कि वे झारखंड के बोकारो के गोविंदपुर गांव के रहने वाले हैं. आश्रम की टीम ने गांव की प्रधान अनीता से संपर्क किया. जांच में पता चला कि गांव का परशुराम महतो 20 साल से लापता है. सूचना मिलते ही भाई कामेश्वर महतो परिवार के साथ भरतपुर पहुंचे.

दुकान टूटने पर बिगड़ी थी मानसिक स्थिति

कामेश्वर ने बताया कि परशुराम 20 साल पहले इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिक थे. बोकारो स्टील प्लांट में दुकान टूटने के बाद मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी. उपचार के बाद मुंबई काम की तलाश में गए और फिर वापस नहीं लौटे. माता-पिता का निधन हो गया.

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20 साल तक इंतजार करती पत्नी मालती देवी

परिवार ने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन पत्नी मालती देवी ने हार नहीं मानी. 20 साल तक न दूसरा विवाह किया, न सुहाग के चिह्न छोड़े. मांग में सिंदूर, करवा चौथ का व्रत सब जारी रखा. 

भाई कामेश्वर ने बताया, "घर में बिना दीपावली के दीपावली जैसा माहौल है." सूचना मिलते ही परिवार झारखंड से भरतपुर पहुंचा और आज परशुराम को साथ लेकर रवाना हो गया. अपना घर आश्रम के सचिव नरेन्द्र तिवारी ने कहा कि आश्रम का उद्देश्य सिर्फ सेवा नहीं, बल्कि बिछड़ों को अपनों से मिलाना भी है.

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