कैंटीन का टेंडर हाथ से गया तो ठेकेदार को फंसाने के लिए रची साजिश, लेकिन खुद ही अपने जाल में फंस गया

टेंडर और नौकरी जाने के बाद प्रदीप कुमार ने ऐसी साजिश रची कि वो खुद ही अपनी प्लानिंग में फंस गया. पुलिस पूछताछ में आरोपी ने जुर्म कबूल लिया और पूरी कहानी बयां कर दी.

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प्रकरण में आरोपी प्रदीप कुमार पुलिस की गिरफ्त में है.

जोधपुर के आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. कैंटीन का ठेका हाथ से निकलने और ड्राइवर की नौकरी से हटाए जाने के गुस्से में एक पूर्व ठेकेदार ने बदला लेने के लिए साजिश रची. उसने संचालक को झूठे केस में फंसाने के लिए खतरनाक योजना बनाई. हालांकि, पुलिस और ANTF (एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स) की मुस्तैदी के चलते पूरी साजिश का भंडाफोड़ हो गया और एक बेगुनाह जेल जाने से बाल-बाल बच गया.

पूर्व ठेकेदार के कब्जे में था कमरा

करवड़ थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर स्थित हरिओम फास्ट फूड कैंटीन के एक कमरे में अवैध डोडा पोस्त रखा हुआ है. सूचना मिलते ही एएनटीएफ टीम स्थानीय करवड़ थाना पुलिस को लेकर मौके पर पहुंची. पुलिस ने जब कैंटीन के वर्तमान संचालक से पूछताछ की तो उसने बताया कि कैंटीन परिसर का एक कमरा अभी भी पूर्व ठेकेदार प्रदीप कुमार के कब्जे में है और उसने चाबी अपने पास रखी हुई है. पुलिस ने आरोपी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर अवैध डोडा पोस्त जब्त कर लिया है. मामले की आगे की जांच मथानिया थाना पुलिस अधिकारी तुलसी चौधरी को सौंपी गई है.

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कमरे का ताला तोड़कर निकाला डोडा पोस्त

पुलिस ने विश्वविद्यालय कुलसचिव से स्थिति स्पष्ट की और मौके पर पूर्व ठेकेदार प्रदीप कुमार को बुलवाया. जब उससे कमरे की चाबी मांगी गई तो उसने चाबी होने से इनकार कर दिया. इसके बाद पुलिस ने गवाहों की मौजूदगी में कमरे का ताला तोड़ा. कमरे की तलाशी लेने पर कांच की बोतलों के नीचे से 125 ग्राम अवैध डोडा पोस्त बरामद हुआ.

नौकरी भी गई और टेंडर भी

पुलिस की पूछताछ में आरोपी प्रदीप कुमार ने पूरी साजिश का सच उगल दिया. उसने बताया कि वह पूर्व में इसी कैंटीन को संचालित करता था और साथ ही विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ऑफिस में ड्राइवर भी था. हाल ही में उसे ड्राइवर की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था और इस बार कैंटीन का ठेका भी एक दूसरी एजेंसी के हाथ चला गया. 

पुलिस रेड में फंसाने की थी तैयारी

इसी दोहरे नुकसान और रंजिश के चलते उसने वर्तमान कैंटीन संचालक को एनडीपीएस एक्ट के झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची. इसके लिए उसने बंद कमरे में खुद ही डोडा पोस्त रखवा दिया और फिर अपने एक परिचित के जरिए पुलिस को शिकायत भिजवा दी. ताकि पुलिस रेड मारकर नए संचालक को सीधे जेल भिजवा दे.  

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