मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित नहीं किए जाने के मुद्दे पर सियासत गरमा गई है. कांग्रेस, भारत आदिवासी पार्टी (BAP) और विभिन्न आदिवासी संगठनों के नेताओं ने सवाल उठाए. बांसवाड़ा विधायक और कांग्रेस जिलाध्यक्ष अर्जुन सिंह बामनिया ने कहा कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं देना पूरी तरह अनुचित है. भाजपा एक ओर आदिवासी समाज के सम्मान की बात करती है, जबकि दूसरी ओर उनके सबसे बड़े आस्था स्थल को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने से पीछे हट रही है. उन्होंने इसे भाजपा की दोहरी नीति करार दिया.
बीएपी नेता ने फैसले का किया विरोध
बीएपी (BAP) के नेता और पूर्व प्रत्याशी हेमंत राणा ने भी फैसले का विरोध करते हुए कहा कि पूज्य गोविंद गुरु के नेतृत्व में मानगढ़ धाम पर हजारों आदिवासी शहीद हुए थे. लंबे समय से आदिवासी समाज इस ऐतिहासिक स्थल को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग कर रहा है. उन्होंने कहा कि राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से हर वर्ष बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग मानगढ़ धाम पहुंचते हैं और इस मांग को दोहराते हैं.
बीजेपी जिलाध्यक्ष बोले- पीएम को पत्र लिखकर फिर से मांग उठाएंगे
वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष पुंजीलाल गायरी ने भी कहा कि मानगढ़ धाम आदिवासी समाज ही नहीं, पूरे बांसवाड़ा जिले की आस्था का केंद्र है. उन्होंने कहा कि इस विषय पर प्रधानमंत्री को पुनः पत्र लिखकर मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की जाएगी. उन्होंने विश्वास जताया कि इस महत्वपूर्ण विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए.
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