राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार, 20 अगस्त से शुरू होने जा रहा है. लेकिन सत्र शुरू होने से पहले ही विधानसभा की अवधि और जनहित के मुद्दों पर चर्चा को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं. कांग्रेस जहां विधानसभा की कार्यवाही 20 से 25 दिन तक चलाने की मांग कर रही है, वहीं सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि सत्र 25 अगस्त तक ही चल सकता है.
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई सर्वदलीय बैठक में सत्र के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों और कार्यवाही की अवधि को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद सामने आए. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मांग की कि सदन को 20 से 25 दिनों तक चलाया जाए, ताकि प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सके. उन्होंने छात्रों, युवाओं, महिलाओं, कर्मचारियों, मजदूरों और दलितों से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ स्कूलों की स्थिति पर भी विस्तृत चर्चा की मांग की.
'सरकार जवाब नहीं दे पा रही'
टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार आम जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा से बचना चाहती है. उन्होंने कहा कि विधानसभा का सत्र केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए और विपक्ष को जनता की समस्याएं सदन में उठाने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए. उन्होंने आगामी चुनावों का हवाला देकर सत्र की अवधि कम किए जाने की किसी भी कोशिश का भी विरोध किया. जूली ने आरोप लगाया कि सरकार के मंत्री विपक्ष के सवालों का जवाब देने में असमर्थ हैं, इसलिए वह लंबा सत्र नहीं चाहती.
यूसीसी के मुद्दे को लेकर भी जूली ने सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आशंका जताई कि सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़ा विधेयक सदन में ला सकती है और बाद में विपक्ष पर इसे रोकने का आरोप लगाकर सत्र को जल्द समाप्त कर सकती है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस चाहती है कि सदन 20 से 25 दिन तक चले.
हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार
वहीं, सरकार के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. उन्होंने बताया कि सर्वदलीय बैठक में सदन के संभावित कामकाज और विपक्ष की मांगों पर चर्चा हुई है. सत्र की अंतिम अवधि का फैसला विधानसभा अध्यक्ष और सरकार मिलकर करेंगे. हालांकि, गर्ग ने संकेत दिया कि विधानसभा का सत्र 25 अगस्त तक चल सकता है. उन्होंने आगामी चुनावों और ऐसे सत्रों की सामान्य अवधि का हवाला देते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही बहुत लंबी चलने की संभावना नहीं है.
गर्ग ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार पर आरोप लगाने से पहले अपने कार्यकाल का रिकॉर्ड देखना चाहिए. उन्होंने विपक्ष से सदन की कार्यवाही से 'भागने' के बजाय उसमें पूरी तरह हिस्सा लेने को कहा.
इस बीच राम मंदिर चंदे में कथित गबन का मुद्दा भी विधानसभा में हंगामे का कारण बन सकता है. विपक्ष ने इस मामले पर सदन में चर्चा की मांग की है. इस पर जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष के सवालों का जवाब देगी.
सत्र की अवधि ही बनी राजनीतिक मुद्दा
सत्र में छात्रों, बेरोजगारी, महिलाओं, कर्मचारियों, दलितों और स्कूलों से जुड़े मुद्दों के अलावा शासन से संबंधित कई अन्य मामलों पर सरकार को विपक्ष के सवालों का सामना करना पड़ सकता है. यूसीसी का प्रस्ताव और राम मंदिर चंदे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी सदन में राजनीतिक टकराव को बढ़ा सकता है.
फिलहाल कांग्रेस 20 से 25 दिन तक सदन चलाने की मांग पर अड़ी है, जबकि सरकार की ओर से 25 अगस्त तक सत्र चलने के संकेत दिए गए हैं. ऐसे में सत्र की अवधि ही विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहली बड़ी राजनीतिक लड़ाई का मुद्दा बन सकती है.
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