बांसवाड़ा-डूंगरपुर के सांसद राजकुमार रोत ने संसद में पेसा (PESA) अधिनियम पर पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कई ऐसे तथ्य स्वीकार किए हैं, जो आदिवासी क्षेत्रों में पेसा कानून के वास्तविक क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. सरकार ने बताया कि पेसा कानून 1996 से लागू है और यह 5वीं अनुसूची के 10 राज्यों, 77,564 गांवों, 22,040 ग्राम पंचायतों और 664 ब्लॉकों में लागू होता है. इसके बावजूद केंद्र सरकार ने स्वीकार किया कि पेसा के तहत गठित ग्राम सभाओं की संख्या का कोई राज्यवार रिकॉर्ड उसके पास उपलब्ध नहीं है.
ओडिशा में लागू नहीं नियम
सरकार ने यह भी माना कि 10 पेसा राज्यों में से 9 राज्यों ने ही पेसा नियम अधिसूचित किए हैं, जबकि ओडिशा ने अबतक पैसा नियम अधिसूचित नहीं किए है. वही, राजस्थान में ग्राम पंचायत के सरपंच को ही ग्राम सभा का अध्यक्ष बनाया गया है.
सांसद राजकुमार रोत ने सवाल उठाया कि इससे ग्राम सभा की स्वतंत्रता और पेसा की मूल भावना कमजोर हो रही है, लेकिन केंद्र सरकार ने कहा कि यह राज्य सरकार का विषय है और महाराष्ट्र की तरह अलग ग्राम सभा अध्यक्ष चुनने के लिए कोई निर्देश देने का उसका कोई विचार नहीं है.
आदिवासी समाज के साथ अन्याय- रोत
रोत ने कहा कि यदि केंद्र सरकार पेसा राज्यों की रैंकिंग, प्रशिक्षण, सूचकांक और योजनाओं की निगरानी कर सकती है, तो फिर ग्राम सभा की वास्तविक स्वायत्तता सुनिश्चित करने और पेसा की मूल भावना लागू करवाने की जिम्मेदारी से पीछे हटना आदिवासी समाज के साथ अन्याय है.
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