होलाष्टक अशुभ क्यों है?
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होलाष्टक शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, 'होली' और 'अष्टक' (यानी आठ). सरल शब्दों में, होली (धुलंडी) से ठीक 8 दिन पहले की अवधि को 'होलाष्टक' कहा जाता है.
होलाष्टक होली से ठीक 8 दिन पहले लगता है जो 24 फरवरी से शुरू हो चुका है और 3 मार्च तक चलेगा.
होलाष्टक की इस अवधि के दौरान कोई भी शुभ कार्य वर्जित माना गया है.इसके अशुभ माने जाने के पीछे धार्मिक और ज्योतिषीय, दोनों ही महत्वपूर्ण कारण हैं.
होलाष्टक के इन 8 दिनों को अशुभ मानने का सबसे बड़ा कारण भगवान विष्णु के अनन्य भक्त प्रहलाद से जुड़ा है.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, असुर राजा हिरण्यकश्यप ने इन 8 दिनों में अपने पुत्र प्रहलाद को भगवान की भक्ति छोड़ने के लिए भीषण शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी थीं.
प्रहलाद को मारने के सभी प्रयास विफल होने के बाद, आठवें दिन (पूर्णिमा को) होलिका उसे अपनी गोद में लेकर आग में बैठी थी.
इन 8 दिनों में भक्त प्रहलाद ने अत्यंत पीड़ा झेली थी, इसलिए इस समय को दुखद और नकारात्मक माना जाता है और कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, होलाष्टक के दौरान ग्रह उग्र हो जाते हैं, जिससे उनका शुभ प्रभाव कम हो जाता है.
अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक अलग-अलग ग्रह (जैसे चंद्रमा, सूर्य, शनि, शुक्र, गुरु, बुध, मंगल और राहु) अपनी स्वाभाविक शुभता खो देते हैं.तो उस समय शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आने की आशंका बढ़ जाती है.
यही वजह है कि होलाष्टक के दौरान विवाह, गृह प्रवेश,मुंडन या नामकरण,नया व्यवसाय और कीमती सामान की खरीदारी नहीं की जाती है.
शिव ही सत्य है, शिव ही अनंत है महाशिवरात्रि की अनंत शुभकामनाएं
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