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This Article is From Jan 28, 2026

टीकाराम जूली का बड़ा बयान, बोले- मनरेगा खत्म करने वालों को पंचायत चुनाव में गांव में मत घुसने दीजिए

जूली ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में पंचायतों के पास इतना बजट होता था कि सरपंचों को मुख्यमंत्री या विधायक के चक्कर नहीं काटने पड़ते थे. उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार के समय राजस्थान में सात हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट पंचायत राज और ग्रामीण विकास के लिए आता था.

टीकाराम जूली का बड़ा बयान, बोले- मनरेगा खत्म करने वालों को पंचायत चुनाव में गांव में मत घुसने दीजिए

कांग्रेस के पंचायत राज सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा को खत्म करने की साजिश कर रही है. जूली ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि पंचायत चुनावों में भाजपा नेताओं को गांव में घुसने न दिया जाए.

टीकाराम जूली ने कहा कि कांग्रेस राज में पंचायती राज व्यवस्था की कल्पना इसलिए की गई थी ताकि सत्ता और संसाधन गांव तक पहुंचें. जब यह व्यवस्था बनी, तब देश की नब्बे प्रतिशत से ज्यादा आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती थी. कांग्रेस ने इस सच्चाई को समझते हुए पंचायती राज का मजबूत ढांचा तैयार किया. उन्होंने याद दिलाया कि राजीव गांधी ने तिहत्तरवां और चौहत्तरवां संविधान संशोधन कर पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया समय पर चुनाव, अधिकार और बजट की गारंटी दी.

''आज महंगाई दोगुनी हो चुकी है, लेकिन बजट नहीं मिलता''

जूली ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में पंचायतों के पास इतना बजट होता था कि सरपंचों को मुख्यमंत्री या विधायक के चक्कर नहीं काटने पड़ते थे. उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार के समय राजस्थान में सात हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट पंचायत राज और ग्रामीण विकास के लिए आता था. आज महंगाई दोगुनी हो चुकी है लेकिन उस स्तर का बजट अब भी राजस्थान को नहीं मिल रहा.

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने सुनियोजित तरीके से पंचायत राज को कमजोर किया है. पिछले दो वर्षों में पंचायत राज के लिए कोई ठोस बजट नहीं दिया गया. संविधान में प्रावधान होने के बावजूद पंचायत और उपचुनाव समय पर नहीं कराए जा रहे. छह महीने के भीतर होने वाले उपचुनाव भी सरकार नहीं करा पा रही है.

''मनरेगा के मूल कानून को ही कमजोर कर दिया गया है''

टीकाराम जूली ने मनरेगा को लेकर सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि सरकार लोगों को यह कहकर गुमराह कर रही है कि केवल नाम बदला गया है और काम के दिन सौ से बढ़ाकर सवा सौ कर दिए गए हैं. सच्चाई यह है कि मनरेगा के मूल कानून को ही कमजोर कर दिया गया है, जो गरीब को काम का अधिकार देता था. पहले मजदूरी का सौ प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी और योजना की लागत का नब्बे प्रतिशत केंद्र से आता था. काम की योजना गांव का सरपंच बनाता था और पंचायत समिति व जिला परिषद से मंजूरी मिलती थी.

''ग्राम रोजगार सहायकों को हटाया जा रहा है''

जूली ने कहा कि अब मेट और ग्राम रोजगार सहायकों को हटाया जा रहा है और उनकी जगह ठेकेदार लाए जाएंगे. सरपंच अब योजना नहीं बनाएगा. योजनाएं दिल्ली में बैठे लोग तय करेंगे और मजदूरों को गांव से दूर काम करने के लिए मजबूर किया जाएगा. पहले मजदूर को यह अधिकार था कि वह साल के किस महीने में काम करेगा यह तय कर सके. अब यह अधिकार छीन लिया गया है. न्यूनतम मजदूरी की गारंटी भी खत्म कर दी गई है.

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