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राजस्थान में करप्शन पर एक्शन, 26 अफसर बर्खास्त और 1 IAS समेत 435 सस्पेंड; 28 की आजीवन पेंशन बंद

कुर्सी का गुरूर और करप्शन की लत... राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में अब यह कॉकटेल नहीं चलेगा. राजस्थान की भजनलाल सरकार ऐसे अफसरों पर कड़ी कार्रवाई कर रही हैं. जानें पिछले ढाई सालों में किस-किस पर गिरी गाज...

राजस्थान में करप्शन पर एक्शन, 26 अफसर बर्खास्त और 1 IAS समेत 435 सस्पेंड; 28 की आजीवन पेंशन बंद
राजस्थान में भ्रष्टचार करते पकड़े गए सैकड़ों अफसरों पर सरकार ने एक्शन ले लिया है. (सांकेतिक तस्वीर)

Rajasthan News: राजस्थान में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और विभागीय लापरवाही के मामलों में राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर चल रही इस प्रक्रिया के तहत अब तक 1 RAS समेत कुल 26 अधिकारियों को सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है. इसके साथ ही, एक IAS अधिकारी समेत 435 कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है. सेवानिवृत्त हो चुके 28 अधिकारियों के मामलों में भी वित्तीय अनियमितताएं पाए जाने पर उनकी आजीवन पेंशन रोकने के आदेश जारी किए गए हैं.

किन-किन अफसरों को नौकरी से हटाया?

राज्य सरकार ने उन अधिकारियों को सीधे नौकरी से हटा दिया है, जिन पर कोर्ट में भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हो चुके हैं या गंभीर विभागीय अनियमिताएं पुष्ट हुई हैं. बर्खास्त होने वाले मुख्य अधिकारियों में RAS अधिकारी नर सिंह, तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक सुरेंद्र सिंह (सामाजिक न्याय) व संजय पांडे (पर्यटन), कृषि उपनिदेशक डॉ. पीआर खींची व राजेश कुमार नैनावत और पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन विकास अधिकारी भरत प्रकाश मेघवाल शामिल हैं. इनके अलावा सहायक आचार्य डॉ. सुनील व्यास व वैजयंती मीणा, खनिज अभियंता अनिल खिमेसरा, सहायक आयुक्त महावीर सिंह आसीवाल, प्रवक्ता प्रियंका दिवाकर, कृषि अधिकारी शीना लुकोश, व्याख्याता अमृत लाल मीणा, लेखा सेवा के नरेंद्र तंवर और चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार, डॉ. राम मोहन सिंह चौहान, डॉ. मुरलीधर शर्मा व डॉ. मनोहर लाल को भी नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है.

इन अधिकारियों की पेंशन रोकने के आदेश

भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार ने रिटायर हो चुके अधिकारियों पर भी नियमानुसार कार्रवाई की है. अपने कार्यकाल के दौरान घोटालों और पद के दुरुपयोग में लिप्त पाए गए 28 अधिकारियों की आजीवन पेंशन और ग्रेच्युटी को स्थायी रूप से रोक दिया गया है. पेंशन गंवाने वाले इन अधिकारियों में आरएएस फतेह राय सोनी, यूआईटी अलवर के तत्कालीन उप सचिव बनवारी लाल मीणा, आरपीएस ओमप्रकाश चंदोलिया और खान विभाग के अतिरिक्त निदेशक राकेश हीरात शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, झालावाड़ के तत्कालीन वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विलास राव गुल्हाने को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है.

108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति, 577 की जांच जारी

एंटी करप्शन ब्यूरो और अन्य जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति जारी कर दी है. इससे आय से अधिक संपत्ति, ट्रैप और पद के दुरुपयोग के मामलों में दागी अधिकारियों पर सीधे अदालत में मुकदमा चलेगा. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत भी 37 मामलों में प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं. वर्तमान में विभिन्न विभागों से जुड़े 577 प्रकरणों की जांच चल रही है, जबकि अखिल भारतीय सेवा (AIS) के 9 अधिकारियों से जुड़ी फाइलें भी प्रक्रियाधीन हैं.

लापरवाही और जवाबदेही पर सरकार का रुख

प्रशासनिक कामकाज को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि आमजन को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देना सरकार की प्राथमिकता है. निर्देशों के अनुसार, फाइलों को बिना कारण लंबित रखने, सरकारी धन का दुरुपयोग करने और जनता के काम में बेवजह देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ आगे भी नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक जवाबदेही से बचने वाले कर्मचारियों को सेवा में बख्शा नहीं जाएगा.

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