शिक्षा विभाग में फर्जी आदेशों के जरिए मनचाही जगह डेपुटेशन हासिल करने का बड़ा मामला सामने आया है. प्रारंभिक शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) गोविंद नारायण शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो शिक्षकों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है. निलंबित किए गए शिक्षकों में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नाहरपुरा (मायापुर) के लेवल-1 शिक्षक श्यामलाल ताड़ा और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय रेल की डांग (अजयरसर) की लेवल-1 शिक्षिका सुमन देवी शामिल हैं. निलंबन अवधि के दौरान श्यामलाल ताड़ा का मुख्यालय सीबीईओ सावर और सुमन देवी का मुख्यालय सीबीईओ भिनाय रहेगा. दोनों ही शिक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने शिक्षा निदेशालय के नाम से फर्जी आदेश तैयार करवाकर और उन्हें आधिकारिक बताकर मनचाही जगह पर कार्य व्यवस्था (डेपुटेशन) का अनुचित लाभ उठाया.
सीबीईओ को सतर्कता बरतने के निर्देश
डीईओ गोविंद नारायण शर्मा के मुताबिक, शिक्षकों के डेपुटेशन आदेशों की सत्यता पर संदेह होने पर जब शिक्षा निदेशालय से पुष्टि कराई गई तो स्पष्ट हुआ कि विभाग से ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी ही नहीं किया गया था. जांच में सामने आया कि दस्तावेजों पर निदेशक ललित कुमार के फर्जी हस्ताक्षर और कूटरचित सील का दुरुपयोग किया गया था.

फर्जीवाड़ा साबित होने के बाद दोनों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. इस घटना के बाद डीईओ ने सभी सीबीईओ, संस्था प्रधानों, पीईईओ और यूसीईईओ को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी नए आदेश, कार्यमुक्ति या प्रतिनियुक्ति पत्र को स्वीकार करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की गहनता से जांच करें. अब आदेशों का सत्यापन संबंधित अधिकारी के ई-साइन, शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज विवरण और राजकाज के वैध रेफरेंस नंबर से किया जाएगा.
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