पैरोल के बाद भी आसाराम जेल से नहीं आए बाहर, राजस्‍थान सरकार से जवाब तलब 

आसाराम नाबालिग से यौन शोषण के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है. जोधपुर के ही एक आयुर्वेद अस्‍पताल में उसका इलाज चल रहा है. 

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आसाराम को पैरोल मिलने के बाद भी रिहा नहीं किया गया.
फाइल फोटो

राजस्थान हाई कोर्ट से 3 अगस्त को आसाराम को 20 दिन की पैरोल म‍िली है. आदेश के बाद भी जेल प्रशासन की ओर से उसे रिहा नहीं किया गया. आसाराम की ओर से पैरोल पर रिहाई नहीं किए जाने को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय में आसाराम ने गुहार लगाई गई है, मामले में उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है.

चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में सुनवाई  

राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिविजन बेंच में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है, अब सरकार की ओर से अदालत में यह स्पष्ट किया जाएगा कि हाई कोर्ट द्वारा पैरोल मंजूर किए जाने के बाद भी आसाराम को जेल से रिहा क्यों नहीं किया गया. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की तारीख निर्धारित की है. 

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सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से किया था इनकार  

सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्‍त को खराब सेहत के आधार पर अंतरिम जमानत का आदेश देने से इनकार कर द‍िया था. सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की याचिका को पेंडिंग रखते हुए कहा कि हालत खराब होने पर दोबारा अंतरिम जमानत की मांग कर सकते हैं. राजस्थान सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया कि आसाराम ने हाईकोर्ट से 20 दिनों की पैरोल की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की बात छुपाई थी.

अंतरिम जमानत की मांग पर पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम बापू की जमानत याचिका पर फ़ैसला करने के लिए AIIMS से विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट मांगी थी. 

एम्‍स ने कहा-  हॉस्पिटल में एडमिट करने की जरूरत नहीं

अदालत यह जानना चाहती थी कि आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति वास्तव में कितनी गंभीर है और क्या उन्हें चिकित्सा आधार पर अंतरिम राहत दी जानी चाहिए. एम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आसाराम को हॉस्पिटल में एडमिट करने की जरूरत नहीं है, लेकिन उनके स्वास्थ्य की 24 घंटे निगरानी रखा जाना चाहिए. 

सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को चौबीसों घंटे मदद के लिए अपनी पसंद का एक ट्रेंड केयरगिवर रखने की इजाजत दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें यह छूट भी दी है कि अगर उनकी हालत बिगड़ती है, तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि आसाराम ने हाई कोर्ट से मौजूदा केस की जानकारी छिपाई थी और पैरोल हासिल की थी, तो बेंच ने इस हरकत की निंदा की. 

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