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4 दिन में 4 इस्तीफे! कोटा कांग्रेस में पंचायत चुनाव से पहले 'इस्तीफा सीजन'

निकाय और पंचायत चुनाव से ठीक पहले कोटा कांग्रेस में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है. नई शहर जिला कार्यकारिणी के गठन के महज चार दिन के भीतर चार पदाधिकारी अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं.

4 दिन में 4 इस्तीफे! कोटा कांग्रेस में पंचायत चुनाव से पहले 'इस्तीफा सीजन'
कांग्रेस नेतृत्व पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने का आरोप है
IANS

कोटा शहर कांग्रेस की नई कार्यकारिणी का गठन होते ही विवाद शुरू हो गया. पहले जिला सचिव मनु मेघवाल ने इस्तीफा दिया और अब महासचिव बलविंदर सिंह बिल्लू के साथ सचिव धर्मा गोचर और राजू पहाड़िया ने भी अपने पद छोड़ दिए. तीनों नेताओं ने प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भेजे इस्तीफे में आरोप लगाया कि उन्हें पहले से छोटे पद देकर उनका डिमोशन किया गया है. उनका कहना है कि सक्रिय कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर चंद नेताओं के करीबियों और चापलूसों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं. इस्तीफा देने वाले नेताओं को कांग्रेस के नेता प्रहलाद गुंजल का समर्थक माना जाता है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तीनों इस्तीफों की भाषा लगभग एक जैसी है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि पूरा घटनाक्रम एक रणनीति के तहत हुआ है.

इस्तीफा देने वाले राजू पहाड़िया ने कहा,"हमारा प्रमोशन की बजाय डिमोशन किया गया है इसलिए पद से इस्तीफा दे रहे हैं, पार्टी के कार्यकर्ता बनकर काम करेंगे, जिनको पद दिए गए हैं उनका पार्टी में कोई वजूद नहीं है चापलूसी करने वालों को पद दे दिए गए."

कांग्रेस जिलाध्यक्ष राखी गौतम

कोटा कांग्रेस जिलाध्यक्ष राखी गौतम
Photo Credit: NDTV

कार्यकारिणी में 'हिस्ट्रीशीटर'

नई कार्यकारिणी में हिस्ट्रीशीटर देवा भड़क को पद दिए जाने को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है. हालांकि जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि किसी के हिस्ट्रीशीटर होने का कोई प्रमाण नहीं है और राजनीतिक मुकदमे अलग विषय हैं. संगठन सर्वोपरि है. जिन्होंने पद से इस्तीफा दिया है, उन्होंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया. यदि वे बिना पद के भी पार्टी के लिए काम करना चाहते हैं तो यह अच्छी बात है. नए लोगों को अवसर मिलेगा. कांग्रेस में गुटबाजी जैसी कोई बात नहीं है.

पार्टी जिलाध्यक्ष राखी गौतम ने कहा,"जिन्होंने इस्तीफा दिया है उनके इस्तीफा का स्वागत है वह पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में पार्टी के साथ जुड़कर काम करना चाहते हैं नए लोगों को मौका मिलेगा."

कोटा कांग्रेस लंबे समय से गुटबाजी से जूझती रही है. पार्टी में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल, हाल ही में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए प्रहलाद गुंजल और जिलाध्यक्ष राखी गौतम के अलग-अलग शक्ति केंद्र माने जाते हैं. नई कार्यकारिणी के गठन के साथ यह खींचतान फिर खुलकर सामने आ गई है.

निकाय चुनाव से पहले चुनौती

दूसरी तरफ बीजेपी इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर कांग्रेस की कमजोरी बताकर लगातार हमलावर है. राजनीतिक तौर पर कोटा बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है. लोकसभा सीट पर लगातार बीजेपी का कब्जा है और शहर की राजनीति में भी संगठनात्मक मजबूती उसकी सबसे बड़ी ताकत रही है.

ऐसे समय जब निकाय चुनाव नजदीक हैं, कांग्रेस के भीतर बढ़ती नाराजगी और लगातार इस्तीफे पार्टी के लिए चुनौती बन सकते हैं. अगर संगठन के भीतर असंतोष दूर नहीं हुआ तो चुनावी मैदान में कार्यकर्ताओं की एकजुटता प्रभावित हो सकती है. ऐसे में कांग्रेस के सामने सिर्फ बीजेपी से मुकाबले की नहीं, बल्कि पहले अपने संगठन को संभालने की भी बड़ी चुनौती है.

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