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रात में परिवार से हुई बात, सुबह शहीद होने की मिली खबर; रिटायरमेंट से चंद महीने पहले जवान का आया पार्थिव शव

जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकी मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए ब्यावर के वीर सपूत युवराज सिंह चौहान का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. 25 किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा में हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने लाड़ले को विदाई दी. रिपोर्ट- सुमित सारस्वत

रात में परिवार से हुई बात, सुबह शहीद होने की मिली खबर; रिटायरमेंट से चंद महीने पहले जवान का आया पार्थिव शव
शहीद जवान युवराज सिंह चौहान.

Rajasthan News: जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों से लोहा लेते हुए मातृभूमि पर प्राण न्यौछावर करने वाले अग्निवीर जवान युवराज सिंह चौहान की पार्थिव देह जब उनके गृह नगर ब्यावर पहुंची तो पूरा क्षेत्र गमगीन हो उठा. शहादत को नमन करने के लिए सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा. करीब 25 किलोमीटर लंबी इस गौरवमयी अंतिम यात्रा में शामिल हजारों लोग हाथों में तिरंगा थामे 'भारत माता की जय' और 'युवराज अमर रहे' के नारे लगा रहे थे.

चार महीने बाद होना था रिटायरमेंट

युवराज सिंह 17 फरवरी 2022 को भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में भर्ती हुए थे. उन्होंने अपनी सेवा के दौरान जबलपुर, गोवा और पठानकोट जैसे महत्वपूर्ण सैन्य क्षेत्रों में अपनी वीरता का परिचय दिया. वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू के अखनूर सेक्टर में थी. परिवार के लोगों ने बताया कि 5 मई की रात ड्यूटी पर जाने से पहले युवराज ने परिवार से फोन पर बात की थी. उन्होंने सभी का हालचाल पूछा और ढेर सारी बातें कीं. अगले दिन सुबह जब परिजनों ने फोन लगाया तो मोबाइल बंद मिला. दोपहर होते-होते शहादत की खबर घर पहुंच गई थी. दु:खद बात यह है कि उनकी सेवा के मात्र चार महीने ही शेष थे और इसके बाद उनका रिटायरमेंट होने वाला था लेकिन उससे पहले ही उन्होंने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया.

पैतृक गांव में नम आंखों से विदाई

शहीद की अंतिम यात्रा ब्यावर शहर से उनके पैतृक गांव लगेतखेड़ा पहुंची. पूरे मार्ग में ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर वीर सपूत का स्वागत किया. गांव पहुंचते ही माहौल पूरी तरह मातमी हो गया. अपने लाड़ले को तिरंगे में लिपटा देख मां बार-बार बेहोश हो रही थी और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल था. बूढ़ी दादी और पिता प्रताप सिंह की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे.

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

गांव के मुक्तिधाम में सेना की टुकड़ी ने शहीद को सशस्त्र सलामी दी. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से स्थानीय विधायकों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. पिता, माता और बहन बबीता ने अपने वीर योद्धा को अंतिम सैल्यूट किया. राष्ट्रभक्ति के गीतों और जयकारों के बीच युवराज पंचतत्व में विलीन हो गए.

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