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This Article is From Jan 29, 2026

मुख्यमंत्री आरोग्य योजना के क्लेम में लापरवाही, इंश्योरेंस कंपनीयों के नियम सरकारी अस्पतालों पर भारी

कम्पनियों का तर्क यह की अस्पतालों द्वारा क्लेम सही तरीके से, फॉर्म पूरा नहीं भरने और क्लेम समय पर नहीं भेजने की वजह से इंश्योरेंस कंपनीयो द्वारा मेडिकल क्लेम खारिज किया जा रहा हैं.

मुख्यमंत्री आरोग्य योजना के क्लेम में लापरवाही, इंश्योरेंस कंपनीयों के नियम सरकारी अस्पतालों पर भारी

Chief Minister Health Scheme: मुख्यमंत्री आरोग्य योजना के तहत इंश्योरेंस कंपनीयों से मिलने वाले क्लेम में बड़ी लापरवाही सामने आई है. जहां सरकारी अस्पतालों की ओर से क्लेम लेने की प्रक्रिया में मामूली कमियां निकाल कर इंश्योरेंस कंपनियां सरकारी अस्पतालों का इंश्योरेंस क्लेम खारिज कर रही है. पिछ्ले कुछ समय में ही नेशनल इंश्योरेंस और न्यू india इन्श्योरेन्स ने राज्य के सरकारी अस्पतालों को मिलने वाला करीब 48 करोड़ रुपए की इंश्योरेंस राशि को रद्द कर दिया है.

क्लेम खारिज करने के बहाने

मुख्यमंत्री आरोग्य योजना के तहत इलाज करवाने के बाद सरकारी अस्पतालों को मिलने वाली क्लेम राशि में इंश्योरेंस कम्पनिया अपनी मनमर्जी कर रही है. योजना के तहत नेशनल इन्श्योरेन्श और न्यू इंडिया इन्श्योरेन्श कंपनी जिला अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती होने वाले मरीजों की क्लेम राशि इन कम्पनियों से क्लेम करके लेती है, लेकिन क्लेम की जाने वाली राशि कम से कम देनी पड़े इसके लिए इन्श्योरेन्श कंपनीया छोटी-छोटी कमियां निकाल कर अस्पतालों द्वारा किए जानेवाले क्लेम को जानबूझकर रद्द कर रही है. 

वहीं कम्पनियों का तर्क यह की अस्पतालों द्वारा क्लेम सही तरीके से, फॉर्म पूरा नहीं भरने और क्लेम समय पर नहीं भेजने की वजह से इंश्योरेंस कंपनीयो द्वारा मेडिकल क्लेम खारिज किया जा रहा हैं.

28 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस 

वहीं इंश्योरेंस क्लेम रद्द होने से अस्पतालों को कंपनी की ओर से हर माह जहां करोड़ रुपए मिलने चाहिए वहां  इंश्योरेंस कंपनीया करोड़ों रुपए बचा रही है. उधर अस्पतालों को क्लेम का पूरा पैसा नहीं मिलने से नाराज चिकित्सा  विभाग की ओर से 28 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस दिया है. राज्य के सरकारी अस्पतालों का 21% से लेकर 48 परसेंट तक रिजेक्शन है. ऐसे में तय है कि सरकारी अस्पतालो के जहां हर महीने औसतन 5 से 6 करोड रूपए बच सकते हैं वह बचत कंपनी कर रही है. उधर अस्पतालों में आने वाले रोगी इंश्योरेंस क्लेम राशि रद्द होने के पीछे बीमा कम्पनियों और सरकारी अस्पतालों के कर्मचारियों की कमियां मान रहे है.

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