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किशनगढ़ एयरपोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, गहलोत-पायलट ने किया स्वागत; विधायक ने भेंट किया हल

किशनगढ़ एयरपोर्ट पर गहलोत-पायलट की साझा अगवानी के बाद पुष्कर के चिंतन शिविर को लेकर राजस्थान की सियासत उबल पड़ी है. एक तरफ गहलोत ने NEET और पेपर लीक पर केंद्र को घेरा, तो दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्रियों ने राहुल गांधी से किस बात की माफी मांग ली? जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी.

किशनगढ़ एयरपोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, गहलोत-पायलट ने किया स्वागत; विधायक ने भेंट किया हल
राहुल गांधी के किशनगढ़ पहुंचने पर हल देकर उनका स्वागत करते हुए विधायक विकास की तस्वीर.
NDTV Reporter

Ajmer News: कांग्रेस नेता राहुल गांधी सोमवार सुबह करीब 11 बजे विशेष विमान से किशनगढ़ एयरपोर्ट पहुंचे, जहां कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने उनका स्वागत किया. एयरपोर्ट पर सबसे खास तस्वीर तब देखने को मिली जब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और टोंक विधायक सचिन पायलट ने एक साथ खड़े होकर राहुल गांधी की अगवानी की. इतना ही नहीं, एयरपोर्ट के बाहर पार्क गाड़ी में बैठते समय स्थानीय विधायक और नेताओं ने राहुल गांधी को घेर लिया और उन्हें भेंट स्वरूप हल दिया. राहुल गांधी ने भी उसे हाथ लगाकर स्वीकार किया और फिर फोटो खींचवाने के बाद गाड़ी में बैठकर रवाना हो गए.

एयरपोर्ट से विदा होने के तुरंत बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा- 'आज किशनगढ़ एयरपोर्ट पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का स्वागत किया. राजस्थान की पावन भूमि पर आपका हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन है.' राहुल गांधी यहां पुष्कर के तिलोरा में आयोजित कांग्रेस के दो दिवसीय चिंतन शिविर के समापन सत्र में भाग लेने पहुंचे हैं.

थोड़ी देर पहले गहलोत ने केंद्र पर साधा था निशाना

राहुल गांधी के अजमेर आगमन से ठीक पहले गहलोत ने अजमेर सर्किट हाउस में एक प्रेस वार्ता आयोजित की थी. इसमें उन्होंने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कई गंभीर सवाल दागे थे. गहलोत ने कहा था कि वर्ष 2047 में भारत को विश्वगुरु बनाने के दावों पर जवाब केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही दे सकते हैं, क्योंकि तब तक कौन जीवित रहेगा यह किसी को नहीं पता. काला धन और रोजगार जैसे पुराने वादे आज तक अधूरे हैं. इस दौरान NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में आ रही गड़बड़ियों पर चिंता जताते हुए भी गहलोत ने कहा कि इससे देश के 1 करोड़ से अधिक छात्रों का भविष्य अधर में लटका है. सरकार को परीक्षा प्रणाली पारदर्शी बनानी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा की जा रही ट्रेड डील देश के हित में नहीं है. राहुल गांधी लगातार इन राष्ट्रीय मुद्दों को उठा रहे हैं.

'कांग्रेस चाहे जितने शिविर कर ले, राहुल गांधी को मांगनी होगी माफी'

दूसरी तरफ, राहुल गांधी के इस दौरे और कांग्रेस के चिंतन शिविर को लेकर भाजपा के केंद्रीय मंत्रियों ने मोर्चा खोल दिया है. केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है, 'चिंतन शिविर कांग्रेस का आंतरिक मामला है, लेकिन जब से राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने हैं, उनकी भाषा और आचरण में मर्यादा का पूरी तरह अभाव दिखाई देता है. वे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जैसे संवैधानिक पदों के लिए अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करते हैं. देश की जनता इसे स्वीकार नहीं करेगी, उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए.'

वहीं, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा कैडर और नियमित प्रशिक्षण वाली पार्टी है, जिसे देखकर कांग्रेस अब सालों बाद चिंतन करने पर मजबूर हुई है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक देश पर राज किया लेकिन 'गरीबी हटाओ' के खोखले नारों के अलावा किसानों और गरीबों की वास्तविक समस्याओं का कोई समाधान नहीं किया.

राहुल गांधी के दौरे और चिंतन शिविर के क्या हैं सियासी मायने?

राजनीतिक गलियारों में पुष्कर के तिलोरा में चल रहे इस 10 दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन और प्रशिक्षण शिविर और राहुल गांधी के दौरे के मायने केवल एक औपचारिक समापन कार्यक्रम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे राजस्थान कांग्रेस के भविष्य की राजनीति के गहरे संकेत छिपे हैं. केरल और कर्नाटक में सत्ता और नेतृत्व स्तर पर हुए बड़े बदलावों के बाद, अब राहुल गांधी राजस्थान कांग्रेस में संगठन के एक 'नए मॉडल' को नई ताकत देने की तैयारी में हैं. यही वजह है कि इस शिविर में राजस्थान के 50 और दिल्ली के 15 जिला कांग्रेस अध्यक्षों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है. कांग्रेस अब जिला अध्यक्षों के चयन की नई प्रक्रिया और उन्हें संगठन में ज्यादा अधिकार देने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि जमीनी पकड़ को नए सिरे से मजबूत किया जा सके.

इस दौरे को प्रदेश कांग्रेस में आने वाले दिनों में होने वाले संभावित संगठनात्मक बदलावों और आगामी राज्यसभा चुनाव की कड़ियों से जोड़कर देखा जा रहा है. ऐसे में राहुल गांधी का यह संबोधन केवल कार्यकर्ताओं के लिए एक रूटीन मैसेज नहीं है, बल्कि यह राजस्थान कांग्रेस के आगामी चुनावी रोडमैप, नई प्राथमिकताओं और भविष्य के नेतृत्व की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.

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