राजस्थान ओबीसी आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) की रिपोर्ट के मुताबिक, ओबीसी की 92 जातियों (जिनमें 5 एमबीसी जातियां भी शामिल हैं) की कुल आबादी 3.58 करोड़ है. जाट समुदाय जनसंख्या के लिहाज से पहले स्थान पर है, जिनकी संख्या 71.76 लाख बताई गई है. इसके बाद गुर्जर 32.68 लाख के साथ दूसरे, कुम्हार-कुमावत 29.97 लाख के साथ तीसरे, माली-सैनी 27.97 लाख के साथ चौथे, जांगिड़ 12.52 लाख के साथ पांचवें, यादव 11.57 लाख के साथ छठे और मेव 10.84 लाख के साथ सातवें स्थान पर हैं.
74 लाख से अधिक परिवारों का सर्वे
आयोग ने 74 लाख से अधिक ओबीसी परिवारों का सर्वे कर यह आंकड़े जुटाए हैं. पंचायत व निकाय चुनाव से पहले अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट के अनुसार, ओबीसी की कुल 3.58 करोड़ आबादी में से 1.97 करोड़ लोग केवल इन 7 जातियों से आते हैं, जो कुल आबादी का 55.03 प्रतिशत है, जबकि बाकी 85 जातियों की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत है.
आर्थिक स्थिति के बारे में जानिए
आर्थिक स्थिति के मामले में भी यही जातियां अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं. जाट, पाटीदार और जांगिड़ समुदायों में बीपीएल परिवारों का प्रतिशत सबसे कम है, जहां 8 फीसदी से भी कम लोग गरीबी रेखा के नीचे आते हैं.
31 लाख से ज्यादा लोग करते हैं मजदूरी
वहीं, 92 ओबीसी जातियों के 31.50 लाख लोग मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं, जिनमें से अधिकतर केवल 20 जातियों से हैं. मजदूरी के मामले में कुम्हार-कुमावत समुदाय पहले स्थान पर है, जिनके 3.32 लाख लोग मजदूरी करते हैं. इसके बाद सैनी समुदाय के 2.67 लाख, जाट समुदाय के 2.16 लाख, गुर्जर के 1.80 लाख, रावत के 1.25 लाख और जांगिड़ समुदाय के 1.15 लाख लोग मजदूरी से जुड़े हुए हैं.
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