मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार (16 अगस्त) को राजस्थान पेंशनर समाज के 'सम्मान और आभार कार्यक्रम' को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि राजस्थान आज विकास की जिन बुलंदियों पर खड़ा है, उसकी नींव में पेंशनर समाज का पसीना, परिश्रम और दूरदर्शिता शामिल है. प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, कृषि, ग्रामीण विकास और जनसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान की अमिट छाप है. उनका मार्गदर्शन और जीवन अनुभव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत है. इस दौरान पेंशनर्स के लिए मिल रही सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी.
ग्रेच्युटी की सीमा बढ़कर 25 लाख रुपये तक
सीएम ने बताया कि कि राज्य सरकार पेंशनर्स को सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आवश्यक सुविधाएं सहज उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है. राज्य में ग्रेच्युटी की सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये के अलावा 30 जून को सेवानिवृत्त होने वाले राज्य कार्मिकों को 1 जुलाई की वेतन वृद्धि का लाभ भी मिलेगा.
साथ ही कर्मचारी की मृत्यु होने पर 10 वर्ष तक बढ़ी हुई पारिवारिक पेंशन देने का प्रावधान किया गया है. 70 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन भत्ता दिया जा रहा है और यह लाभ न्यायिक सेवा के पेंशनर एवं पारिवारिक पेंशनरों के लिए भी लागू किया गया है.

घर बैठे मिल रही पेंशन संबंधी सुविधाएं
सरकार ने पेंशन स्वीकृति संबंधी नियमों को सरल बनाने के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू की गई है. ताकि सेवानिवृत्त कार्मिकों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें. पेंशन प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के साथ पीपीओ, जीपीओ एवं सीपीओ की स्वीकृतियां डिजिटल हस्ताक्षर से जारी की जा रही हैं, इससे पारिवारिक पेंशन के लिए सत्यापन प्रक्रिया भी आसान की गई है.
पेंशनर्स को मिल रही हैं ये खास सुविधाएं
- आउटडोर चिकित्सा सुविधा व्यय की सीमा 30 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये
- राजकीय उपक्रमों, स्वायत्तशासी संस्थाओं, बोर्ड, निगम एवं विश्वविद्यालयों के पेंशनरों के लिए यह सीमा 30 हजार रुपये.
- 5 लाख से अधिक पेंशनर को अब तक घर बैठे जीवन प्रमाण-पत्र की सुविधा
- पारिवारिक पेंशन की पात्रता के दायरे में विशेष योग्यजन भाई-बहन भी शामिल
कर्मचारियों की पदोन्नति में अनुभव की समय सीमा में छूट
मुख्यमंत्री ने कहा कि पदोन्नति में अनुभव की समय सीमा में दो वर्ष की छूट और दिव्यांग कर्मचारियों को वर्ष 2016 से पदोन्नति का लाभ देने के लिए नियमों में संशोधन किए गए हैं. विभिन्न राज्य एवं अधीनस्थ सेवाओं में पदोन्नति के अवसर बढ़ाने जैसे निर्णय किए गए हैं. सेवा के दौरान मृत राजकीय कर्मचारियों के परिवार को राहत देने के लिए अनुकंपा नियुक्ति में पुत्रवधू को भी पात्र मानने का निर्णय किया गया है.
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