विज्ञापन
This Article is From Mar 11, 2026

Sheetala Ashtami 2026: शीतलाष्टमी पर शील डूंगरी पहाड़ी की 151 सीढ़ियां चढ़कर भक्तों ने किए माता के दर्शन; जानें मंदिर का खास इतिहास

चाकसू स्थित शील की डूंगरी पर प्रसिद्ध लक्खी मेले में शीतला माता के दर्शनों के लिए आस्था का सैलाब देखने को मिल रहा है.दूर-दराज से पहुंचे लाखों भक्त मंदिर की 151 सीढ़ियां चढ़कर माता शीतला के दर्शन कर रहे है.

Sheetala Ashtami 2026: शीतलाष्टमी पर शील डूंगरी पहाड़ी की 151 सीढ़ियां चढ़कर भक्तों ने किए माता के दर्शन; जानें मंदिर का खास इतिहास
Sheetala Mata Mandir, Chaksu( jaipur)
NDTV

Chaksu Sheetala Mata Mandir: शीतलाष्टमी के अवसर पर राजधानी जयपुर के शहर चाकसू स्थित शील की डूंगरी पर प्रसिद्ध लक्खी मेले में शीतला माता के दर्शनों के लिए आस्था का सैलाब देखने को मिल रहा है.दूर-दराज से पहुंचे लाखों भक्त मंदिर की 151 सीढ़ियां चढ़कर माता शीतला के दर्शन कर रहे है. भक्ति का आलम ऐसा है कि यहां तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में  दर्शनों के लिए लंबी कतारें लगी हुई है. हालांकि मेले में आने वाले भक्तों का सिलसिला बीते शाम से ही शुरू हों गया था, जो आज बसौड़ा पर चरम पर हैं.

 एक दिन पहले (बासी) बनाए प्रसाद का लगता है माता को भोग

शीतलाष्टमी की पूजा में माना जाता है कि श्रद्धालु इस दिन माता को ठंडे पकवानों का भोग अर्पित करते हैं. मान्यता है कि अष्टमी से पहले सप्तमी पर माता को एक दिन पहले (बासी) बनाए गए ठंडे व्यंजन अर्पित किए जाते हैं. जिसमें राबड़ी, पुआ, दही और अन्य ठंडे पकवानों का विशेष भोग लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि और रोगों से रक्षा की कामना करते हैं.

कौन है शील की डूंगरी की शीतला माता

शील की डूंगरी राजस्थान के जयपुर जिले की चाकसू तहसील में स्थित एक ऐतिहासिक और धार्मिक पहाड़ी है. यहा 600 साल पहले इस मंदिर 600 की स्थापना की गई थी. जिसका सबूत बारहदरी पर लगे शिलालेख में अंकित है. जिसमें लिखा है कि जयपुर नरेश माधोसिंह के पुत्र गंगासिंह एवं गोपाल सिंह के चेचक हुई थी.जो शीतला माता की कृपा से ठीक हो गई थी. 

इसके बाद राजा माधोसिंह ने शील की डूंगरी पर मंदिर एवं बारहदरी का निर्माण कराया. यहां बनी बारहदरी भवन पर लगे शिलालेख में माता के गुणगान का उल्लेख मिलता है. पहाड़ी पर माता का मंदिर है जिसमें मां शीतलामाता की मूर्ति विराजमान है.माता को चेचक (Smallpox) की देवी माना जाता है और ग्रामीण इलाकों में इन्हें 'सेढ माता' के नाम से भी पूजा जाता है.

होली के आठ दिन बाद लगता है लक्की मेला

बता दें कि यहां हर साल होली के आठ दिन बाद यानी 'शीतला अष्टमी' (चैत्र कृष्ण अष्टमी) को एक बहुत बड़ा मेला भरता है. इस दिन श्रद्धालु माता को 'बासोड़ा' यानी एक दिन पहले बना ठंडा भोजन भोग के रूप में अर्पित करते हैं. जो इस वक्त चल रहा है. 

सुरक्षा और व्यवस्थाएं चाक चौबंद

 मेले को लेकर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाएं चाक चौबंद हैं. दिनभर दर्शन और पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी है. श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिल रहा है.

यह भी पढ़ें: Rajasthan Weather: राजस्थान में मार्च बना मई, जयपुर से जोधपुर तक तप रहे शहर, IMD ने बताया कब मिलेगी हीटवेव से राहत

पूरी स्टोरी पढ़ें

Rajasthan.NDTV.in पर राजस्थान की ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें. देश और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं. इसके अलावा, मनोरंजन की दुनिया हो, या क्रिकेट का खुमार, लाइफ़स्टाइल टिप्स हों, या अनोखी-अनूठी ऑफ़बीट ख़बरें, सब मिलेगा यहां-ढेरों फोटो स्टोरी और वीडियो के साथ.

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com