पिता ने टैक्सी चलाकर पढ़ाया, बेटे ने जेईई एडवांस में पाई सफलता

यश ने बताया कि मेरे परिवार की फाइनेंशियल स्थित मजबूत नहीं थी. कोविड के दौरान ऑनलाइन पढ़ना शुरू किया और रुझान बढ़ता गया. माता-पिता दिन रात मेहनत कर पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करते रहे .

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यश के पिता टैक्सी चालक और माता गृहिणी हैं.
बांसवाड़ा:

सफलता की राह में रूकावटें तो आती ही हैं, पर यहां मंजिल उन्हीं को मिलती है जो हार नहीं मानते हैं. हालात विपरित हों तब भी बिन घबराए अपने लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास करें तो सफलता तय है.बांसवाड़ा के खांदू कॉलोनी निवासी यश कौशल ने ऐसा ही कुछ कर दिखाया है.यश का चयन हाल ही में आईआईटी धनबाद-झारखंड में हुआ है.

दरअसल, यश के पिता टैक्सी चालक और माता गृहिणी हैं. लेकिन अपने बेटे के सपनों को साकार करने के लिए दोनों ने दिन-रात मेहनत की. बेटे को पढ़ाने के लिए एक तरफ जहां पिता टैक्सी लेकर भाड़े पर निकलते तो मां भी घर में ट्यूशन और मसाला पैकिंग का काम करने जाया करती थी. 

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यश ने जेईई एडवांस-2023 में एआईआर 9123वीं रैंक हासिल की
कोविड के समय से ही यश पढ़ाई में जुट गए थे और दसवीं कक्षा के साथ ही ऑनलाइन कोर्स के जरिए अपने सपनों को पूरा करने में लग गए. बेटे की मेहनत और योग्यता को माता-पिता ने पहचाना और स्वयं अभावों में रहकर उसके लिए पढ़ाई के हर इंतजाम पूरे किए. ऑनलाइन कोर्स की फीस जमा करवाई, बुक्स उपलब्ध करवाई और उसका हौसला बढ़ाते रहे. इस तपस्या के परिणाम भी सुखद आए और यश ने जेईई एडवांस-2023 में एआईआर 9123वीं रैंक हासिल की.

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माता-पिता की मेहतन ने किया प्रोत्साहित
यश ने बताया कि मेरे परिवार की फाइनेंशियल स्थित मजबूत नहीं थी. कोविड के दौरान ऑनलाइन पढ़ना शुरू किया और रुझान बढ़ता गया. माता-पिता दिन रात मेहनत कर पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करते रहे. उनकी मेहनत ने हौसला दिया. इसे देखते हुए मन में प्रण किया कि उनकी यह मेहनत बेकार नहीं जाने दूंगा. इसके बाद दुगुनी ताकत के साथ पढ़ाई में जुटा. हर दिन 12 से 14 घंटें तक पढ़ाई की और आज परिणाम सबके सामने है.

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