नौकरी छोड़ बने कवि, फिर बने कलाकार, तारक मेहता की रह चुके हैं जान

तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो में अब भले ही शैलेष लोढ़ा नजर न आते हों लेकिन ये नाम उनके साथ चस्पा हो चुका है. इस किरदार में उन्हें पसंद करने वाले कई फैन्स ऐसे हैं जो शैलेश लोढ़ा का असली नाम ही तारक मेहता समझते हैं. और, उनकी ऑन स्क्रीन वाइफ को ही रियल लाइफ वाइफ समझते हैं.

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नौकरी छोड़ पूरा किया कवि बनने का सपना
नई दिल्ली:

तारक मेहता का उल्टा चश्मा शो में अब भले ही शैलेष लोढ़ा नजर न आते हों लेकिन ये नाम उनके साथ चस्पा हो चुका है. इस किरदार में उन्हें पसंद करने वाले कई फैन्स ऐसे हैं जो शैलेश लोढ़ा का असली नाम ही तारक मेहता समझते हैं. और, उनकी ऑन स्क्रीन वाइफ को ही रियल लाइफ वाइफ समझते हैं. लेकिन उनकी फैमिली इस पूरी चकाचौंध से बहुत अलग है. शैलेश लोढ़ा खुद एक कलाकार और एक कवि हैं. दिलचस्प बात ये हैं कि वो खुद कई खूबियों के मालिक हैं और उनकी पत्नी इस मामले में उन पर भारी हैं और अब उनकी बिटिया भी इसी राह पर चल पड़ी है. लेकिन ये राह चुनने के लिए शैलेश लोढ़ा को पहले मन मारकर नौकरी करनी पड़ी.

करनी पड़ी नौकरी

शैलेश लोढ़ा का जन्म राजस्थान के शहर जोधपुर में हुआ था. वो एक मारवाड़ी परिवार में जन्मे. शैलेश लोढ़ा के पिता श्याम सिंह लोढ़ा एक सरकारी कर्मचारी थे जबकि मां शोभा लोढ़ा को हिंदी लिखने और पढ़ने का बहुत शौक था. शैलेश लोढ़ा को कविता लिखने का हुनर अपनी मां से ही मिला. लेकिन परिवार का ग्लैमर वर्ल्ड से कोई नाता नहीं था. सोच थी तो केवल ये कि पढ़ लिख कर एक अच्छी नौकरी लग जाए. माता पिता की इस नसीहत को मान कर शैलेश लोढ़ा ने नौकरी भी शुरु कर ली. लेकिन उनका मन उसमें रमा नहीं. सब छोड़ छाड़ कर शैलेश लोढ़ा मुंबई में आ गए. यहां एक्टिंग की क्लास ली और लिखना जारी रखा. उनके करियर की शुरुआत कॉमेडी सर्कस सीजन 2 से हुई. उसके बाद वो साहित्य और टीवी की दुनिया में अपने लिए जगह बनाते चले.

पिता के नक्शेकदम पर बेटी

शैलेश लोढ़ा खुद तो कवि हैं ही उनकी पत्नी भी स्वाति लोढ़ा भी लेखिका हैं. साथ ही वो लाइफ कोच और मोटिवेटर भी हैं, जिनकी किताबें भी प्रकाशित हो चुकी हैं. न सिर्फ शैलेश लोढ़ा और उनकी पत्नी स्वाति लोढ़ा बल्कि उनकी बेटी स्वरा लोढ़ा ने भी लेखन में रुचि लेनी शुरू कर दी है. अपनी मम्मी के साथ मिलकर उन्होंने एक किताब लिखी “54 Reasons Why Parent's Suck And Phew!. महज 17 साल की उम्र में स्वरा लोढ़ा की ये किताब छप चुकी है.