अमजेर: कभी शाही सवारी हुआ करता था तांगा, आज अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद से जूझ रहे चालक

एक समय था जब रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों पर तांगा वाले लाइन से सवारी बैठाने के लिए खड़े रहते थे. फिर उन्हें शहर भर की सैर कराते थे. तांगा में जुते घोड़े भी काफी सजे-संवरे होते थे. समय बदला और यातायात के साधन भी बदल गए. लेकिन अजमेर में तांगे की सवारी आज भी की जा सकती है.

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अमजेर: कभी शाही सवारी हुआ करता था तांगा, आज अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद से जूझ रहे चालक

Ajmer News: कभी राजे राजवाडों की शाही सवारी के रूप में जाने जाना वाला घोड़ा गाड़ी (तांगा) आज आजीविका चलाने के साधन के रूप के जाना जाता है. आज तांगा चालक गोवर्धन जो पिछले 30 सालों से आनासागर के रामप्रसाद घाट से अजमेर आने वाले पर्यटकों को दरगाह, पुष्कर, रामप्रसाद घाट के चारों तरफ लाने ले जाने का काम करते हैं. प्रतिदिन 600 से ₹700 कमाते हैं, जिसमें ₹300 का चारा घोड़े के लिए खरीदना पड़ता है. ऐसे में बची कमाई से घर चलना मुश्किल होता है. गोर्धन ने बताया कि इस बार अजमेर में निर्दलीय प्रत्याशियों का दबदबा रहेगा. अजमेर उत्तर से भाजपा से बागी निर्दलीय ज्ञानचंद सारस्वत उनकी पहली पसंद है.

किसी ने नहीं ली सुध

हालांकि कोई भी जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी ने आज तक तांगा चालकों की कोई सहायता नहीं की. गोवर्धन ने बताया कि घोड़ागाड़ी वह सवारी है जिसे एक घोड़ा खींचता है. आज के आधुनिक युग में जहां एक ओर यातायात के साधनों के रूप में ऑटो रिक्शा, ई रिक्शा आम चलन में आ गए हैं. वहीं घोड़ा गाड़ी आज भी नगर में अपनी पहचान कायम रखने के कामयाब रही है. एक समय था जब रेलवे स्टेशन और अन्य स्थानों पर तांगा वाले लाइन से सवारी बैठाने के लिए खड़े रहते थे. फिर उन्हें शहर भर की सैर कराते थे. तांगा में जुते घोड़े भी काफी सजे-संवरे होते थे. समय बदला और यातायात के साधन भी बदल गए. लेकिन अजमेर में तांगे की सवारी आज भी की जा सकती है. तांगे में बैठकर  अजमेर आनासागर के रामप्रसाद घाट के चारों तरफ और ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह घूमना बेहद मस्ती भरा अनुभव है. यहां के ज्यादातर तांगे ढके होते हैं. इस खूबी के कारण यह बैठने वाले को शाही ठाठ की अनुभूति देते हैं.

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तांगा स्टैंड हटाने के आदेश

अरब सागर रामप्रसाद के घाट के पास करीब 25 से 30 तांगा चालक तांगा चला कर अपना और अपने घर परिवार का गुजर बसर कर रहे हैं. उनके बच्चों को भी यह ज्यादा उच्च शिक्षा नहीं दे पा रहे जिसकी वजह से उनके घर परिवार का विकास अच्छे तरीके से नहीं हुआ. गोवर्धन बताते हैं कि जिला प्रशासन ने तो तांगा स्टैंड ही सब जगह से खत्म कर दिए और यहां से भी हटाने की बात करते हैं. मगर ड्यूटी पर तैनात कुछ पुलिस कर्मियों के सहयोग से वह पर्यटक और जायरीनो को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने ले जाने का काम करते हैं, जिससे उन्हें कुछ आमदनी हो जाती है.

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