Holi 2026: भरतपुर में यहां होली पर बंधी थी राधा-कृष्ण की चुनरी में गांठ, तब से कहलाया 'गांठौली का गुलाल कुंड'

राजस्थान के नवनिर्मित जिले डीग के बॉर्डर पर बसा एक छोटा सा गांव गांठौली' अपनी एक ऐसी कहानी कहता है, जो भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की प्रेम लीला का साक्षात प्रमाण माना जाता

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गुलाल कुंड
IANS

 Deeg Gulal Kund Special holi: भारत में होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था और परंपराओं का त्योहार है. जब बात ब्रज की होली की हो, तो बरबस ही मथुरा-वृंदावन का नाम जेहन में आता है. लेकिन राजस्थान के नवनिर्मित जिले डीग के बॉर्डर पर बसा एक छोटा सा गांव गांठौली' अपनी एक ऐसी कहानी कहता है, जो भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की प्रेम लीला का साक्षात प्रमाण माना जाता . यहां का 'गुलाल कुंड' आज भी द्वापर युग की होली के रहस्यों को समेटे हुए है.

गांठौली नाम के पीछे छिपी है एक 'ठिठोली'

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस गांव का नाम 'गांठौली' पड़ने के पीछे एक बेहद दिलचस्प प्रसंग है. स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि एक बार जब राधा-कृष्ण अपनी सखियों के साथ होली खेलकर थक गए, तो वे एक सिंहासन पर विश्राम करने विराजे. इसी दौरान सखियों ने मजाक (ठिठोली) करते हुए कान्हा के अंगवस्त्र और राधा जी की चुनरी के छोर में एक गांठ बांध दी. इसी 'गांठ की वजह से इस स्थान का नाम गांठौली पड़ गया.

गुलाल कुंड जहां धुले थे होली के वस्त्र

गांव में स्थित 'गुलाल कुंड' को लेकर ग्रामीणों की अटूट श्रद्धा है. कहा जाता है कि राधा-कृष्ण ने इसी कुंड में जी भरकर अबीर-गुलाल उड़ाया था, जिससे इसका पानी आज भी भक्ति के रंगों में रंगा हुआ है. मान्यता कि होली खेलने के बाद युगल सरकार ने अपने भीगे हुए वस्त्र इसी कुंड के जल में धोए थे. एक और रोचक तथ्य यह है कि चूंकि बरसाना राधा रानी का मायका था और परंपरा के अनुसार बेटियां मायके में होली नहीं खेलतीं, इसलिए उन्होंने कान्हा के साथ होली खेलने के लिए गांठौली के इस एकांत और पवित्र कुंड को चुना था.

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