Dapa Pratha: राजस्थान का वो समाज जहां दहेज लेने के बजाय दुल्हन को 'टैक्स' देता है दूल्हा, आदिकाल से चली आ रही परंपरा

Dapa Pratha Kya Hai: दापा प्रथा आदिवासी संस्कृति की एक अनोखी विरासत है, जो दहेज प्रथा के विपरीत है. यह प्रथा आदिवासी समाज में लैंगिक समानता और सामुदायिक सहयोग को बढ़ावा देती है. यह प्रथा आदिवासी समुदायों में प्रचलित है और वैवाहिक संबंधों को मजबूत करती है.

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सांकेतिक तस्वीर.

Rajasthan News: देश में दहेज लेने और देने पर कानूनी प्रतिबंध होने के बावजूद हर साल पुलिस थानों में हजारों मुकदमे दहेज को लेकर दर्ज होते हैं, लेकिन आदिवासी समाज में आज दिन तक दहेज को लेकर कोई प्रकरण दर्ज नहीं हुआ. कारण जानकार आप आश्चर्य में पड़ सकते हैं, क्योंकि आदिवासी समाज में दहेज लेने की कोई परम्परा ही नहीं है. बल्कि इसके उलट आदिवासी समाज में दूल्हा पक्ष को दुल्हन के परिवार को 'दापा' देना पड़ता है, जिसके बारे में कुछ दिन पहले बीएपी के सांसद राजकुमार रोत ने भी सोशल मीडिया पर इसका उल्लेख किया था. आइए जानते हैं कि आखिर दापा प्रथा है क्या और इसके सामाजिक मायने क्या हैं?

दूल्हा देता है दुल्हन को टैक्स

राजस्थान के आदिवासी समुदायों में दापा प्रथा एक विशिष्ट सांस्कृतिक रीति है, जो विवाह समारोहों के दौरान देखी जाती है. यह प्रथा दहेज प्रथा के विपरीत है और आदिवासी समाज में लैंगिक समानता व सामुदायिक एकजुटता को दर्शाती है. दापा प्रथा में दूल्हा पक्ष दुल्हन पक्ष को विभिन्न श्रेणियों में शुल्क (टैक्स) देता है, जो समुदाय के विभिन्न सदस्यों के बीच वितरित किया जाता है. यह प्रथा आदिवासी समाज में लैंगिक समानता और सामुदायिक सहयोग को बढ़ावा देती है. दापा प्रथा में विभिन्न प्रकार के शुल्क शामिल हैं, जिनमें गांव में प्रवेश शुल्क, फला, परिवार, बुआ, मामा, गमेती और अन्य सामाजिक इकाइयों के लिए निर्धारित शुल्क शामिल हैं.

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दापा प्रथा आदिवासी संस्कृति की एक अनोखी विरासत है, जो दहेज प्रथा के विपरीत है. यह प्रथा आदिवासी समाज में लैंगिक समानता और सामुदायिक सहयोग को बढ़ावा देती है. यह प्रथा आदिवासी समुदायों में प्रचलित है और वैवाहिक संबंधों को मजबूत करती है.

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दापा vs. दहेज: मुख्य अंतर

दापा प्रथा और दहेज प्रथा में मुख्य अंतर यह है कि दापा प्रथा में दूल्हा पक्ष दुल्हन पक्ष को शुल्क देता है, जबकि दहेज प्रथा में दुल्हन पक्ष दूल्हा पक्ष को धन/संपत्ति देता है. दापा प्रथा सामाजिक सम्मान और सहयोग का प्रतीक है, जबकि दहेज प्रथा लैंगिक असमानता और आर्थिक शोषण को बढ़ावा देती है. दापा प्रथा आदिवासी संस्कृति की एक अनोखी विरासत है, जो आदिवासी समाज में लैंगिक समानता और सामुदायिक सहयोग को बढ़ावा देती है. यह प्रथा आदिवासी समुदायों में प्रचलित है और वैवाहिक संबंधों को मजबूत करती है. आधुनिकता और बाहरी प्रभावों के कारण ऐसी प्रथाओं के संरक्षण की आवश्यकता है.

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