समोसा और पोहा बेचने वाले बुजुर्ग ने कठिन परिश्रम को लेकर कही ऐसी बात, सभी को मिलेगा जीवन का सबक

पोस्ट में बताया गया है कि कैसे बुजुर्ग इस उम्र में घर पर आराम करने के बजाय कड़ी मेहनत करते है और वह भी सिर्फ अपनी खुशी के लिए.

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समोसा और पोहा बेचने वाले बुजुर्ग के कठिन परिश्रम को देख मिलेगा सबक
नई दिल्ली: वर्तमान समय में सफल होने के लिए हर किसी को अपने कार्यस्थल पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने की जरूरत है. न केवल सर्वोत्तम बल्कि थोड़ा अधिक भी. और कभी-कभी, व्यक्ति सफलता का पीछा करते हुए अपने वर्क लाइफ में बैलेंस बनाए रखने में विफल हो जाता है. जहां बहुत से लोग रिटायर होने के बाद आराम करने का सपना तो जरूर देखते हैं, लेकिन उसके बाद भी उनकी भागदौड़ कम नहीं होती.

लेकिन आज हम आपको एक ऐसी पोस्ट दिखाने जा रहे हैं जो आपको रिटायर होने के बाद भी कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करेगी. आर्यांश द्वारा ट्विटर पर शेयर की गई कहानी में उदयपुर (Udaipur) के एक बुजुर्ग समोसा विक्रेता (samosa seller) को दिखाया गया है.

पोस्ट में बताया गया है कि कैसे बुजुर्ग इस उम्र में घर पर आराम करने के बजाय कड़ी मेहनत करते है और वह भी सिर्फ अपनी खुशी के लिए.

 

कैप्शन में लिखा है, “जब मैंने कोर्ट सर्कल उदयपुर के पास ट्रैफिक सिग्नल के पास अपनी कार पार्क की, तो भारी बारिश हो रही थी, जहां मैंने एक बूढ़े चाचा को गर्म समोसा और पोहा बेचते देखा.”

समोसा विक्रेता ने कहा, “बेटा, मैं अब इस उम्र में पैसे के लिए काम नहीं करता. मैं अपने दिल को खुश रखने के लिए काम करता हूं. घर पर अकेला बैठने से यहां बैठना बेहतर है. जब मैं चार लोगों के खुशी से भरे चेहरे देखता हूं, जो मेरे खाने का स्वाद लेते है, तो मेरा दिल खुशी से भर जाता है.'' 

आर्यांश ने कहा, "जब पूरी दुनिया काम की आलोचना करती है, वहीं कुछ लोग अपनी रिटायरमेंट की कहानियां लिख रहे हैं."

पोस्ट को 1.2 मिलियन से अधिक बार देखा गया और ढेर सारी प्रतिक्रियाएं मिलीं. समोसा विक्रेता का सरल लेकिन गहरा संदेश कई लोगों को पसंद आया. 
 
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