राजस्थान के सरकारी स्कूलों के खस्ताहाल इमारतों को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार बहस हो रही है. पिछले साल राजस्थान के झालावाड़ जिले में बारिश के मौसम में एक बड़ा स्कूल हादसा हो गया था जिसमें सात बच्चों की मौत हो गई थी. उस हादसे के बाद बीते एक साल में स्कूल भवनों की सुरक्षा को लेकर काफी शिकायतें भी सामने आईं और कई दावे भी किए गए. लेकिन, इसके बावजूद हादसों का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा. ऐसा ही एक नया हादसा डूंगरपुर जिले में सामने आया है जिसमें ऐसे समय स्कूल के एक कमरे की छत गिर गई जब बच्चे स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे.
तेज आवास होते ही भागे बच्चे और टीचर
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सत्तु में अपर प्राइमरी स्कूल में रोजाना की तरह स्कूल में कक्षाएं चल रही थीं. स्कूल में करीब 120 बच्चे पढ़ते हैं. बच्चे कक्षाओं में बैठे थे और टीचर उन्हें पढ़ा रहे थे. उसी दरम्यान बंद पड़े जर्जरहाल एक कमरे की छत अचानक से भरभराकर ढह गई. तेज आवाज आते ही स्कूल के बच्चे ओर टीचर कमरों से बाहर निकल गए.
उन्होंने बाहर जाकर देखा तो जर्जरहाल दो कमरों में से एक कमरे की छत गिर गई थी. गनीमत यह थी कि इन जर्जर कमरों में सालभर से कक्षाएं बंद कर दी गई थीं. ऐसे में वहां बच्चे नहीं थे जिससे बड़ा हादसा होने से टल गया.
10 में से 2 कमरे जर्जर
हादसे के बाद शिक्षकों ने इसकी सूचना पीईईओ पंकज वर्मा को दी. जिस पर पीईईओ ओर सीबीईओ दीपक शाह मौके पर पहुंचे. स्कूल प्रबंधन ने उन्हें बताया कि स्कूल में 10 से में 2 कमरे जर्जर हो चुके हैं. इस वजह से उन्हें असुरक्षित घोषित किया गया था ओर कमरों का उपयोग पूरी से बंद कर दिया था. सीबीईओ ने बताया कि स्कूल में एक कमरे की छत अब भी जर्जर हो चुकी है. नई छत डालने के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं और मंजूरी मिलने पर जल्द ही कमरों को ठीक करवाया जाएगा.
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