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जयपुर के वार्ड 76 में BJP के दो ‘अधिकृत’ प्रत्याशी! आज खुलेगा पर्चे का राज, किसका नामांकन रहेगा वैध?

जयपुर के वार्ड-76 में दो दावेदारों ने बीजेपी के स‍िंबल पर नामांकन कराने का मामला सामने आया है. आज नामांकन पत्रों की जांच के बाद क‍िसी एक उम्‍मीदवार का नामांकन रद्द हो जाएगा. 

जयपुर के वार्ड 76 में BJP के दो ‘अधिकृत’ प्रत्याशी! आज खुलेगा पर्चे का राज, किसका नामांकन रहेगा वैध?
पुनीत ने भी बीजेपी के सिंबल पर नामांकन किया.
NDTV Reporter

भाजपा में टिकट को लेकर चली खींचतान के बाद जयपुर नगर निगम के वार्ड 76 का चुनावी मुकाबला अब एक नए पेच में फंस गया है. पार्टी की तरह से एक ही सीट पर दो नामांकन पत्रों में भाजपा का अधिकृत सिंबल लगाए जाने से मामला दिलचस्प हो गया है. अब सबकी नजरें आज होने वाली नामांकन पत्रों की जांच पर टिकी हैं.  सवाल यही है क‍ि जांच के बाद भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी कौन रहेगा? पुनीत कर्णावट या कुलदीप मिश्रा?

पुनीत और कालीचरण ने नामांकन किया 

दरअसल, टिकट को लेकर भाजपा में दिनभर चली कश्‍मकश के बीच पुनीत कर्णावट ने सोमवार को आखिरकार बीजेपी के सिंबल के साथ अपना नामांकन दाखिल कर दिया. खास बात यह रही कि सुबह विधायक कालीचरण सराफ से भाजपा का सिंबल लेने वाले कुलदीप मिश्रा भी इस दौरान मौजूद रहे.  कुलदीप मिश्रा ने भी इसी वार्ड से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर अपना पर्चा दाखिल किया और नामांकन पत्र के साथ पार्टी का अधिकृत सिंबल लेटर रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष जमा कराया. 

दोनों ने बीजेपी के सिंबल पर किया नामांकन 

मामला इसलिए और पेचीदा हो गया है क्योंकि दोनों ही नामांकन में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी का सिंबल लगाया गया है.  कुलदीप मिश्रा और पुनीत कर्णावट दोनों एक-दूसरे के करीबी मित्र रहे हैं. दोनों को पूर्व मंत्री राजपाल सिंह की टीम के मजबूत स्तंभों में भी माना जाता है. कुलदीप मिश्रा विधायक कालीचरण सराफ के पड़ोसी हैं, वहीं पुनीत कर्णावट को सराफ का राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाता रहा है. 

फॉर्म जांच के बाद RO करेंगे फाइनल फैसला

टिकट को लेकर उस समय नया मोड़ आया जब सोमवार सुबह कालीचरण सराफ की ओर से कुलदीप मिश्रा को भाजपा का सिंबल दिया गया. हालांकि, इसके बाद पार्टी स्तर पर प्रदेशाध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं का दखल हुआ और पूर्व उप-महापौर पुनीत कर्णावट के नाम से सिंबल जारी किया गया. खास बात यह है कि भाजपा की लिस्ट में पुनीत कर्णावट का नाम प्रत्याशी के रूप में सामने आया.  

इसके बाद दोनों नेताओं ने भाजपा के प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया. दोनों ने अपने-अपने नामांकन पत्र के साथ अधिकृत प्रत्याशी का सिंबल लेटर भी जमा कराया. दोनों ही एक-दूसरे के सिंबल को लेकर अनभिज्ञता जताते नजर आए. 

नामांकन पत्रों के जांच के बाद होगा फैसला 

अब अंतिम फैसला नामांकन पत्रों की जांच के दौरान होगा. रिटर्निंग ऑफिसर दोनों पर्चों के साथ लगाए गए अधिकृत दस्तावेजों और सिंबल लेटर की वैधता की जांच करेंगे. बीजेपी ने विधि प्रकोष्ठ के संयोजक को किया सिंबल के लिए अधिकृत, सौरभ सारस्वत ने साथ जाकर भराया पुनीत का नॉमिनेशन

वार्ड 76 में एक ही पार्टी के दो दावेदार के पास बीजेपी सिंबल के बाद सवाल कई हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच में किसका नामांकन सही पाया जाएगा? किसका पर्चा वैध रहेगा? और आखिर भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी बनकर मैदान में कौन उतरेगा? क्या इसे चुनाव की लड़ाई से पहले पार्टी में आपसी संघर्ष के रूप में देखा जाए? 

हालांकि पार्टी के विधि प्रकोष्ठ के संयोजक सौरभ सारस्वत ने खुद को सिंबल जारी करने के लिए अधिकृत बताते हुए RO के समक्ष पुनीत कर्णावट का नामांकन दाखिल कराया और उनके सिंबल को सही बताया, लेकिन आज होने वाली नामांकन पत्रों की जांच के बाद ही असल तस्वीर साफ हो पाएगी. 

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