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This Article is From Mar 20, 2026

Rajasthan: महिला की शादी को कोर्ट ने कर दिया रद्द, घरवालों ने बिन पूछे बचपन में ही कर दिया था विवाह

जोधपुर की एक पारिवारिक अदालत ने 21 साल की एक महिला के विवाह को रद्द कर दिया है जिसकी शादी 12 साल की उम्र में कर दी गई थी.

Rajasthan: महिला की शादी को कोर्ट ने कर दिया रद्द, घरवालों ने बिन पूछे बचपन में ही कर दिया था विवाह
प्रतीकात्मक तस्वीर
NDTV

राजस्थान में बाल विवाह के एक मामले में अदालत ने एक बड़ा फ़ैसला सुनाया है. अदालत ने एक ऐसी महिला की शादी को रद्द कर दिया है जिसका रिश्ता उसके घरवालों ने बचपन में ही तय कर दिया था. बाद में ससुराल वाले जब उसे ले जाने के लिए दबाव डालने लगे तो वह अदालत में चली गई. इसके बाद एक फैमिली कोर्ट ने मामले की सुनवाई की और उसकी 9 साल पहले हुई शादी को निरस्त कर दिया.

12 साल की उम्र में ही कर दी थी शादी

यह मामला जोधपुर जिले के एक ग्रामीण इलाके का है. वहां की एक 21 साल की महिला ने पारिवारिक कोर्ट में फरियाद की. उसने बताया कि सामाजिक दबाव के कारण उसकी शादी 2016 में जोधपुर जिले के एक ग्रामीण इलाके में कर दी गई थी. कुछ साल बादउसके ससुराल वालों ने ‘गौना' के लिए दबाव डालना शुरू किया जब शादी के बाद विवाहिता स्त्री को पहली बार अपने पति के घर जाना होता है और वास्तविक वैवाहिक जीवन की शुरुआत करनी होती है. महिला ने कहा कि इसकी वजह से उसे कथित रूप से मानसिक परेशानी होने लगी.

इसके बाद लगभग 18 महीने पहले उसने विवाह रद्द करने के लिए अदालत में याचिका दायर की. उसने पारिवारिक अदालत में एक याचिका दायर कर विवाह की वैधता को चुनौती दी. उसने बताया कि उसकी शादी बिना उसकी सहमति के कर दी गई थी जब वह केवल 12 वर्ष की थी. कार्यवाही के दौरान, याचिकाकर्ता ने आयु संबंधी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए जो इस दावे का समर्थन करते थे कि विवाह के समय वह नाबालिग थी.

पति भी था नाबालिग

याचिका में यह भी दलील दी गई कि जिस व्यक्ति से उसका विवाह हुआ था, उसकी उम्र भी 21 वर्ष नहीं थी जो कि गैरकानूनी है. हालांकि, प्रतिवादी ने दलील दी कि विवाह बाद में तब हुआ था जब दोनों पक्ष वयस्क हो गए थे. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, पीठासीन अधिकारी वरुण तलवार ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया और विवाह को रद्द कर दिया.

अदालत ने अपने आदेश में बाल विवाह के कारण बच्चों के वर्तमान और भविष्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस प्रथा को समाप्त करने के लिए सामाजिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया.

जोधपुर की एक पारिवारिक अदालत ने बृहस्पतिवार को आदेश पारित कर 21 वर्षीय महिला के विवाह को रद्द कर दिया. महिला की शादी 12 साल की उम्र में कर दी गई थी.

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