जल जीवन मिशन घोटाले में आरोपी रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल को झटका लगा है. राजस्थान हाईकोर्ट ने सुबोध अग्रवाल की याचिका पर गुरुवार (19 मार्च) को सुनवाई से इनकार कर दिया. सुबोध अग्रवाल के खिलाफ 30 अक्टूबर 2024 को एफआईआर दर्ज हुई थी. उन्होंने एफआईआर को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच ने इस मामले को किसी अन्य बेंच के सामने लगाने के लिए कहा है.
अगले हफ्ते होगी सुनवाई
इस मामले में हाईकोर्ट अगले सप्ताह इस पर सुनवाई कर सकता है. अधिवक्ता सुधीर जैन ने बताया कि इस मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी पदमचंद जैन, महेश मित्तल, रामकिशन मीणा, रमेश मीणा व परितोष गुप्ता के खिलाफ 29 जनवरी के आदेश से दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई थी. इन सभी आरोपियों के खिलाफ यह रोक जारी है.
अग्रवाल का तर्क- कार्यकाल में 10% से कम टेंडर मंजूर
सुबोध अग्रवाल की ओर से दायर याचिका में बताया गया है कि उनका पीएचईडी में कार्यकाल 18 अप्रैल 2022 से शुरू हुआ था. इससे पहले गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल ने इरकॉन के फर्जी प्रमाणपत्रों से टेंडर हासिल कर लिए थे. वहीं, 95% वर्क ऑर्डर तत्कालीन एसीएस सुधांश पंत की अध्यक्षता वाली वित्त समिति ने स्वीकृत किए थे. अग्रवाल के कार्यकाल में केवल 10% से कम मूल्य के टेंडर मंजूर हुए.
एसीबी कोर्ट जारी कर चुकी है वारंट
गौरतलब है कि हाल ही में एसीबी ने कई जगह पर छापेमारी कर इस घोटाले से जुड़े 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. वहीं, रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल समेत 4 की तलाश जारी है. इसके लिए पहले उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी हुआ था. हाल ही में एसीबी कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है.
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