Kishangarh News: किशनगढ़ के हाउसिंग बोर्ड स्थित सरकारी डिस्पेंसरी में लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां एक मरीज को 43 दिन पहले एक्सपायर हो चुकी दवा थमा दी गई. गनीमत रही कि मरीज ने घर जाने से पहले दवा की तारीख जांच ली, जिससे एक संभावित खतरा टल गया.
राजारेडी निवासी 26 वर्षीय नितिन नेभनानी मसूड़ों में दर्द की शिकायत लेकर डिस्पेंसरी पहुंचे थे. डॉक्टर ने जांच के बाद टैबलेट और एक सिरप लिखी. दवा वितरण केंद्र से उन्हें निर्धारित दवाइयां दे दी गईं. लेकिन नितिन ने एहतियातन दवा की पैकिंग पर अंकित एक्सपायरी डेट देखी तो चौंक गए. सिरप की एक्सपायरी 1 जनवरी 2026 दर्ज थी, यानी दवा को एक्सपायर हुए 43 दिन बीत चुके थे.
मरीज ने जताई आपत्ति, उठे बड़े सवाल
नितिन ने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई. उनका कहना है कि यदि वे पढ़े-लिखे नहीं होते या तारीख जांचने की आदत न होती, तो यह दवा सेवन कर लेते. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई बुजुर्ग या अनपढ़ मरीज यह दवा ले जाता, तो उसकी सेहत पर पड़ने वाले असर का जिम्मेदार कौन होता
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठी उंगली
इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में दवा स्टॉक की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि दवाओं की नियमित जांच और स्टॉक ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए. एक्सपायरी दवाओं का वितरण सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ है.
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पूरे दवा स्टॉक की तुरंत जांच कराई जाए और जिम्मेदार कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो. फिलहाल यह मामला मरीज की सतर्कता से उजागर हुआ है, लेकिन यह सवाल जरूर छोड़ गया है कि क्या हर मरीज इतना जागरूक होता है?