आभानेरी फेस्टिवल: चांद बावड़ी पर राजस्थानी लोक संस्कृति और कला का भव्य प्रदर्शन, विदेशी पर्यटक हुए मंत्रमुग्ध

दौसा जिले के बांदीकुई में राजस्थान पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से आठवीं सदी में निर्मित विश्व प्रसिद्ध आभानेरी की चांद बावड़ी पर दो दिवसीय आभानेरी फेस्टीवल का समापन हुआ. इस दौरान चांद बावड़ी की फूलों व रंगीन लाइटिंग से आर्कषक सजावट की गई.

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आभानेरी फेस्टिवल पर लोक संस्कृति की दिखी छटा
दौसा:

दौसा जिले के बांदीकुई में राजस्थान पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन की ओर से आठवीं सदी में निर्मित विश्व प्रसिद्ध आभानेरी की चांद बावड़ी पर दो दिवसीय आभानेरी फेस्टिवल का समापन मंगलवार को हो गया. इस दौरान चांद बावड़ी की फूलों व रंगीन लाइटिंग से आर्कषक सजावट की गई.

राजस्थान पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि चांद बावड़ी पर राजस्थानी लोक कलाकारों की ओर से बहुरूपिया, कच्ची घोड़ी नृत्य, शहनाई वादन, कठपुतली नृत्य, घेरा पद दंगल की प्रस्तुति दी गई. मंगलवार को शाम भारतीय कला संस्थान की ओर से रासरंग रसिया की प्रस्तुति दी गई.

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आभानेरी फेस्टिवल का उद्देश्य

आभानेरी फेस्टिवल का उद्देश्य आभानेरी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है. यह फेस्टिवल हर साल अक्टूबर महीने में आयोजित किया जाता है. इस फेस्टिवल के माध्यम से राजस्थानी लोक संस्कृति और कला को भी प्रदर्शित किया जाता है.

आभानेरी क्यों प्रसिद्ध है

आभानेरी राजस्थान के दौसा जिले की बांदीकुई तहसील से 7 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित एक गांव है. यह गांव अपनी ऐतिहासिकता के कारण विश्व विख्यात है. चांद बावड़ी तथा हर्षद माता मंदिर इसी गांव में स्थित हैं.

कार्यक्रम देख पर्यटक हुए अभीभूत 

दो दिवसीय आभानेरी फेस्टिवल में काफी संख्या में पहुंचे विदेशी एवं स्थानीय पर्यटक चांद बावडी के अनूठे स्थापत्य को देख कर अभीभूत हो गए. इस दौरान दौसा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बजरंग सिंह शेखावत, बांदीकुई डिप्टी एसपी ईश्वर सिंह भी मौजूद रहे.

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