889 साल पुरानी अजमेर की आनासागर झील पर सियासत का 'गंदा' खेल, करोड़ों के बजट और सफाई पर घमासान

अजमेर के पर्यटन के लिहाज अहम आनासागर झील प्रदूषित पानी, गाद और जलकुंभी से प्रभावित हो रही है. अब इस झील की सफाई को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी बयानबाजी शुरू हो गई.

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आनासागर झील पर सियासत का 'गंदा' खेल

अजमेर शहर की पहचान, इतिहास और खूबसूरती से जुड़ी आनासागर झील आज एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. कभी अजमेर की जीवनरेखा रही यह ऐतिहासिक झील अब प्रदूषण, गंदगी, जलकुंभी, गाद और सीवरेज जैसे गंभीर सवालों से जूझ रही है. इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं और नगर निगम चुनाव से पहले आनासागर अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती दिखाई दे रही है. आनासागर का इतिहास करीब 889 वर्ष पुराना है. इतिहास के अनुसार, चौहान शासक अर्णोराज, जिन्हें आनाजी के नाम से भी जाना जाता है, ने वर्ष 1137 ईस्वी में इस कृत्रिम झील का निर्माण कराया था.

पर्यटन का अहम हिस्सा है आनासागर झील

यह झील उस दौर में जल संरक्षण और अजमेर की जल जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से बनाई गई थी. बाद में मुगल काल में जहांगीर ने झील के किनारे दौलत बाग और शाहजहां ने संगमरमर की बारादरी का निर्माण कराया. यही वजह है कि आनासागर केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि अजमेर के इतिहास, पर्यटन और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है. 

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समय के साथ शहर का विस्तार हुआ और झील पर दबाव बढ़ता गया. आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषित पानी, गाद और जलकुंभी झील की स्थिति को प्रभावित कर रहे हैं. झील की जलधारण क्षमता बढ़ाने और गहराई बहाल करने के लिए अब बड़े स्तर पर डीसिल्टिंग यानी गाद निकालने की योजना पर काम हो रहा है.

हाल ही में आनासागर की खुदाई और डीसिल्टिंग के लिए 10.50 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति की जानकारी सामने आई है. वहीं आनासागर और वरुण सागर के व्यापक कायाकल्प के लिए लगभग 41 करोड़ रुपये के मास्टरप्लान की भी चर्चा है. 

झील की सफाई को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

इसी बीच झील की सफाई और गाद निकालने के काम को लेकर कांग्रेस ने भाजपा और नगर निगम पर निशाना साधा है. कांग्रेस शहर अध्यक्ष डॉ राजकुमार जयपाल का आरोप है कि वर्षों से आनासागर की बदहाली पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया और अब जब नगर निगम चुनाव नजदीक हैं, तब झील का मुद्दा राजनीतिक रूप से गरमाया है. कांग्रेस ने आनासागर की स्थिति को लेकर अजमेर बंद का आह्वान किया और सरकार तथा नगर निगम से जवाब मांगा.

इसके जवाब में भाजपा ने राजनीतिक आरोपों के बजाय मैदान में उतरकर तीन दिवसीय श्रमदान और सफाई अभियान चलाने का निर्णय लिया. भाजपा के प्रवक्ता गिरधर शर्मा  का कहना है कि आनासागर की सफाई केवल राजनीति का विषय नहीं, बल्कि जनभागीदारी का मुद्दा है. वहीं कांग्रेस का कहना है कि श्रमदान अपनी जगह है, लेकिन करोड़ों रुपये की योजनाओं, ठेकों और स्थायी समाधान पर भी पारदर्शिता जरूरी है. 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद क्या आनासागर की वास्तविक स्थिति बदलेगी? क्या झील में गंदे पानी की आवक को स्थायी रूप से रोका जाएगा? क्या गाद निकालने के बाद फिर से वही स्थिति नहीं बनेगी? और क्या सफाई तथा डीसिल्टिंग के काम की निगरानी पारदर्शी तरीके से होगी?

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आनासागर अजमेर की सिर्फ एक झील नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक पहचान है. आज कांग्रेस इसे सरकार और नगर निगम की विफलता बता रही है, भाजपा इसे जनभागीदारी से बचाने का अभियान बता रही है और प्रशासन योजनाओं के जरिए समाधान का दावा कर रहा है. लेकिन असली परीक्षा तब होगी, जब करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद आनासागर वास्तव में साफ, गहरी और प्रदूषण मुक्त दिखाई देगी.

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