अजमेर मर्डर केसः पिता की हत्या के बाद बेफिक्री से चाय पीता रहा बेटा, 'तिजोरी की चाबी' बनी बहन की मौत की वजह

Ajmer former Sarpanch Ramsingh murder: संपत्ति हाथ से जाने का डर, मां का अपमान और पिता रामसिंह का बर्ताव, कई ऐसी वजहों ने आरोपी को परेशान कर दिया था. उसने 5 महीने तक प्लानिंग की और फिर एक दिन मौका पाकर रामसिंह की हत्या कर दी.

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हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपी घर के बाहर रोने का नाटक करने लगे.

अजमेर जिले के बोराड़ा थाना क्षेत्र में हुए पूर्व सरपंच परिवार के सनसनीखेज नरसंहार में हर पल खौफनाक खुलासे हो रहे हैं. जिसे शुरुआत में कार अग्निकांड का रूप देकर 'हादसा' साबित करने की कोशिश की जा रही थी, उसकी परतें जब पुलिस ने उधेड़ीं तो रिश्तों का सबसे वीभत्स चेहरा सामने आया. इस पूरे सामूहिक हत्याकांड का मास्टरमाइंड रामसिंह का खुद का नाबालिग बेटा निकला. उसने अपनी मां सुनीता और बहन के साथ मिलकर इस रूह कंपा देने वाली वारदात को अंजाम दिया. पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों से हुई पूछताछ में जो टाइमलाइन और मर्डर का तरीका सामने आया है, उसने तफ्तीश करने वाले अधिकारियों को भी सन्न कर दिया है. खूनी साजिश की स्क्रिप्ट पिछले 5 महीने से लिखी जा रही थी. इस हत्याकांड की पूरी सिलसिलेवार कहानी ढंग से पढ़िए. 

देर रात तक गेम खेलता रहा आरोपी

कासिर रोड स्थित इस सुनसान फार्म हाउस पर करीब 8 सदस्यों का यह बड़ा परिवार एक साथ रहता था. आसपास कोई मकान नहीं होने के कारण यहां होने वाली किसी भी हलचल की भनक बाहर नहीं जा सकती थी. बुधवार (27 मई) की शाम को रामसिंह दो बियर की बोतलें लेकर आया था. बियर पीने के बाद रामसिंह और उसकी दूसरी पत्नी सुरज्ञान कमरे में अलग-अलग तरफ सोने चले गए. परिवार के अन्य सदस्य भी अपने कमरों में थे.

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रात को जभी सब सो गए, तब नाबालिग बेटा कमरे में मोबाइल पर ऑनलाइन गेम खेलता रहा. वह अपने पिता के गहरी नींद में जाने का इंतजार कर रहा था. रात के करीब 2 बजे जब फार्म हाउस पर सन्नाटा पसर गया, तब बेटा दबे पांव रामसिंह के कमरे में घुसा. उसे यह पता था कि वार किस हिस्से पर करना है, ताकि पिता की आवाज ना निकले और उसकी मौत हो जाए. उसने सीधे रामसिंह के कान के पास चाकू से वार किया. रामसिंह बिना एक भी चीख निकाले मौत की नींद सो गया.

और फिर एक के बाद एक 4 कत्ल 

लेकिन, रामसिंह के पास सो रही दूसरी पत्नी सुरज्ञान की आंख खुल गई थी. उसने हिम्मत दिखाते हुए आरोपी से चाकू छीन लिया और शोर मचाने लगी. प्लानिंग के मुताबिक, पहली पत्नी सुनीता और उसकी बेटी भी कमरे में दाखिल हो गईं. तीनों ने मिलकर सुरज्ञान को दबोचा, उसके हाथ से चाकू छीना और बेरहमी से उसका गला रेतकर उसे भी मौत के घाट उतार दिया.

इस चीख-पुकार को सुनकर पास के कमरे में सो रही रामसिंह की बुजुर्ग मां पूसी देवी और 30 वर्षीय अविवाहित भांजी महिमा भी वहां पहुंच गईं. कमरे का नजारा देखकर महिमा चिल्लाने लगी, तो पकड़े जाने के डर से सुनीता और उसके बेटे-बेटी ने महिमा पर भी ताबड़तोड़ वार कर उसकी हत्या कर दी. इसके बाद बुजुर्ग मां पूसी देवी को भी रास्ते से हटा दिया गया. देखते ही देखते चंद मिनटों के भीतर एक ही कमरे में चार लाशें बिछ गईं

महिमा से नफरत करता था आरोपी

पुलिस तफ्तीश में यह बात भी साफ हुई है कि आरोपी परिवार रामसिंह की 30 वर्षीय भांजी महिमा से बेहद नफरत करता था. महिमा शादीशुदा नहीं थी और रामसिंह के साथ ही रहती थी. रामसिंह के तमाम जमीनी सौदे, बैंक खातों का संचालन और लेन-देन का पूरा हिसाब-किताब महिमा ही संभालती थी. सुनीता और उसके बच्चों को लगता था कि महिमा ही सुरज्ञान के साथ मिलकर उनकी संपत्ति हड़प रही है. नफरत की वजह से महिमा को भी बेरहमी से मार डाला.

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हादसा बताने की कोशिश में शवों को गाड़ी में रखकर आग लगा दी.

फार्म हाउस से 500 मीटर दूर स्कॉर्पियो को लगाई आग

चारों हत्याएं करने के बाद तड़के करीब 4 बजे सबूत मिटाने का खेल शुरू हुआ. चारों शवों को घसीटकर रामसिंह की ही स्कॉर्पियो कार में ठूंसा गया. आरोपी लड़का खुद स्कॉर्पियो चलाकर फार्म हाउस से करीब 500 मीटर दूर अराई रोड पर ले गया. उसने गाड़ी को सड़क से नीचे उतारा और डीजल छिड़ककर उसमें आग लगा दी, ताकि देखने वालों को यह लगे कि यह कार शॉर्ट सर्किट या एक्सीडेंट के कारण जली है. वारदात को अंजाम देकर आरोपी वापस घर आ गए. सुबह वे घर के बाहर बैठकर रोने का नाटक करने लगे. आरोपी बेटा घर के बाहर सामान्य रूप से चाय पीता नजर आया, जिससे पुलिस का शक गहरा गया.

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