राजस्थान में NTA की तर्ज पर बनेगी एजेंसी, क्या RPSC का विकल्प होगी? बजट ऐलान के बाद बढ़ी सियासी हलचल

नई टेस्टिंग एजेंसी का स्वरूप, अधिकार क्षेत्र और RPSC व अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के साथ उसका संबंध क्या होगा?इस पर सरकार की ओर से विस्तृत खाका आना बाकी है.

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Rajasthan News: भजनलाल सरकार ने अपने तीसरे पूर्ण बजट में भर्ती परीक्षाओं को लेकर बड़ा नवाचार करते हुए प्रदेश में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की तर्ज पर नई टेस्टिंग एजेंसी गठित करने की घोषणा की है. विधानसभा में हुए इस ऐलान के बाद से ही यह चर्चा तेज हो गई है कि यह एजेंसी आखिर किस तरह काम करेगी? क्या यह राजस्थान लोक सेवा आयोग यानी RPSC और अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड का विकल्प बनेगी या उनके समानांतर कुछ प्रमुख भर्तियां आयोजित करेगी?

वित्त मंत्री और डिप्टी सीएम दिया कुमारी ने सदन में घोषणा करते हुए कहा कि राजस्थान की नई टेस्टिंग एजेंसी NTA की तर्ज पर काम करेगी और भर्ती परीक्षाओं को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जाएगा.

कांग्रेस ने किया स्वागत, कहा- सरकार ने माना व्यवस्था ठीक नहीं

सरकार की इस घोषणा का कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि इस फैसले से यह स्पष्ट है कि सरकार ने स्वीकार कर लिया है कि वर्तमान भर्ती व्यवस्था में खामियां हैं.
हरीश चौधरी ने कहा, “सबसे बड़ी सफलता युवाओं और विद्यार्थियों की है कि सरकार ने यह मान लिया है कि जो व्यवस्था चल रही है, वह ठीक नहीं है.”

उन्होंने सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि बजट में प्रस्ताव तो रख दिया गया है, लेकिन यह तय होना चाहिए कि निष्पक्ष परीक्षा किस प्रणाली से कराई जाएगी? उन्होंने सुझाव दिया कि अब तकनीक काफी आगे बढ़ चुकी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधार पर मूल्यांकन और इंटरव्यू तक संभव हैं. चौधरी ने कहा कि केवल ओएमआर शीट जांचने की पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़ने की जरूरत है. पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पब्लिक डोमेन में उपलब्ध कराया जाना चाहिए.

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“RPSC और चयन बोर्ड की उपयोगिता पर सवाल”

जब उनसे पूछा गया कि नई एजेंसी बनने के बाद RPSC और अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड की क्या भूमिका रहेगी, तो हरीश चौधरी ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “वह तो अस्तित्व में ही नहीं हैं, वहां से योग्य विद्यार्थियों को न्याय नहीं मिल रहा.”
उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रियाओं में लगातार अन्याय हो रहा है और इस मुद्दे को वह पिछली सरकार के समय से उठाते आ रहे हैं.

भाजपा का समर्थन, कहा- युवाओं का भरोसा और मजबूत होगा

वहीं भाजपा विधायक गोपाल शर्मा ने भी सरकार के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने पेपर लीक पर काफी हद तक लगाम लगाई है और अब युवाओं का भरोसा और मजबूत करने के लिए इस तरह की प्रोफेशनल टेस्टिंग एजेंसी की जरूरत थी. गोपाल शर्मा ने कहा कि नई एजेंसी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और पेशेवर तरीके से आयोजित कर सकेगी. उन्होंने बताया कि फिलहाल बजट में इसकी घोषणा हुई है और जल्द ही इसके गठन व नियमों को लेकर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

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अब सबसे बड़ा सवाल

नई टेस्टिंग एजेंसी का स्वरूप, अधिकार क्षेत्र और RPSC व अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के साथ उसका संबंध क्या होगा?इस पर सरकार की ओर से विस्तृत खाका आना बाकी है. युवाओं की नजर अब इस बात पर है कि क्या यह कदम भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बहाल कर पाएगा?