राजस्थान में यूरिया खाद की मांग कर रहे किसानों का विरोध कई जगह पर देखने को मिल रहा है. अनूपगढ़ (श्रीगंगानगर) में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का रास्ता रोकने की चेतावनी दी. साथ ही कहा कि मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में काले झंडे भी दिखाए जाएंगे.शुक्रवार (16 जनवरी) सुबह से ही किसान नई धान मंडी में खाद लेने के लिए कतारों में खड़े थे. जब खाद नहीं मिली तो सभी किसान एसडीएम कार्यालय पहुंच गए. मामला बढ़ता देख कृषि विभाग के सहायक निदेशक जसवंत सिंह बराड़ और तहसीलदार दिव्या चावला भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने किसानों से समझाइश की, लेकिन किसान मांग पर अड़े हुए हैं.
दुकानदारों पर मनमानी के आरोप
किसानों का आरोप है, "दुकानदार अपने गोदाम में यूरिया खाद का स्टॉक कर रहे हैं. जब किसान उनकी दुकान पर यूरिया खाद लेने पहुंचता है तो एक किसान को मात्र 3 बैग यूरिया खाद के दिए जा रहे हैं. यही नहीं, दुकानदारो के द्वारा तीन बैग के साथ अन्य प्रोडक्ट भी किसानों को जबरन बेचे जा रहे हैं."
अधिकारियों को भी जमकर कोसा
प्रदर्शन कर रहे किसान बलराज सिंह राय ने कहा कि मंडी में किसानों को यूरिया खाद वितरित की जा रही है, लेकिन दुकानदारों के द्वारा गुमराह किया जा रहा है. दुकानदार किसानों को यूरिया-खाद के वितरण की सही जानकारी नहीं दे रहे हैं. उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि अधिकारी अपने चहेतों को यूरिया खाद उपलब्ध करवा रहे हैं. जबकि आम किसान अलसुबह से कतारों में खड़ा है, फिर भी उसे खाद नहीं मिल रही.
पूर्व प्रतिपक्ष नेता के विरोध की दी चेतावनी
किसानों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "क्षेत्र में जब भी किसी नेता का आना होता है तो कृषि विभाग के अधिकारियों के द्वारा किसानों को खाद उपलब्ध करवा दी जाती है. जबकि आम दिनों में किसानों की मांग को नहीं सुना जाता. कल शनिवार को राजस्थान के पूर्व प्रतिपक्ष नेता राजेंद्र सिंह राठौड़ का अनूपगढ़ में दौरा है. इस दौरे के दौरान किसान द्वारा पूर्व प्रतिपक्ष नेता राठौड़ को रास्ते में रोका जाएगा और उन्हें काले झंडे दिखाए जाएंगे."
विभाग का तर्क- 5 दुकानों पर यूरिया मिल रहा
कृषि विभाग के सहायक निदेशक जसवंत सिंह बराड़ ने बताया कि आज नई धान मंडी में 5 दुकानों पर यूरिया का वितरण किया जा रहा है. विभाग के द्वारा पूर्व में यूरिया खाद के लिए किसानों को टोकन वितरित किए जा रहे थे, लेकिन 15-20 किसानों को टोकन नहीं मिल पाए हैं.
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