Rajasthan News: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने शनिवार सुबह जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए बड़ा बयान दिया है, जिससे प्रदेश की सियासत गरमा सकती है. गहलोत ने आरोप लगाया है कि उनकी सरकार को गिराने की साजिश में हनुमान बेनीवाल (Hanuman Beniwal) और किरोड़ी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) शामिल थे. गहलोत ने कहा कि ये दोनों नेता आपस में दोस्त हैं और उन्होंने मिलकर उनकी सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया. उन्होंने दावा किया कि ये दोनों नेता उस दौरान 'हेलीकॉप्टर लेकर राजस्थान में घूमे' थे, जिसका मकसद उनकी सरकार को गिराना था. गहलोत ने कहा कि इन दोनों का पुराना इतिहास है और इनका यह रवैया कोई नया नहीं है.
'पैसे लेने की बात क्या राजस्थान में नई है?'
अशोक गहलोत ने इस दौरान टीवी पर इन दोनों नेताओं के बीच चल रही बयानबाजी पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि ये दोनों नेता एक-दूसरे पर किस तरह आरोप लगा रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि इससे राजस्थान के लोगों के बीच क्या संदेश गया होगा. जब उनसे पैसे लेने के आरोपों पर पूछा गया तो गहलोत ने कहा, 'पैसे लेने की बातें तो.... क्या नया इतिहास है राजस्थान में?' उन्होंने इन आरोपों को ज्यादा तवज्जो न देते हुए कहा कि यह एक अलग चर्चा का विषय है. गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार बच गई, यह बहुत बड़ी बात है. उन्होंने कहा कि पैसे लेने की बात तो छोड़िए, इस पर कभी अलग से विस्तार से बात होगी.
साल 2020 के मानेसर एपिसोड के बारे में जानिए
बताते चलें कि राजस्थान की सियासत में 'मानेसर एपिसोड' 2020 के राजनीतिक संकट से जुड़ा है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर संकट आ गया था. जुलाई 2020 में, तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ दिल्ली के पास हरियाणा के मानेसर में एक गेस्ट हाउस में चले गए थे.
इस कदम का उद्देश्य गहलोत सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जताना और कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बनाना था. सियासी हलचल के बीच चर्चाएं तेज हो गईं थी कि गहलोत सरकार के पास बहुमत नहीं है, जिससे सरकार गिरने की आशंका पैदा हो गई थी. इस घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति में भारी उथल-पुथल मचा दी थी.
लगभग एक महीने तक चले इस 'एपिसोड' में, गहलोत ने अपने समर्थक विधायकों को होटलों में ठहराकर अपनी सरकार को बचाए रखा था. अंततः, कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद पायलट और उनके समर्थक विधायक वापस लौट आए थे. इसके चलते गहलोत सरकार सियासी संकट से उबर गई.
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