कोटा की दिव्यांशी ने रचा इतिहास, एशियन गेम्स के लिए राजस्थान की पहली वुशु खिलाड़ी का चयन

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिव्यांशी अपनी छाप छोड़ चुकी हैं. उन्होंने 2024 जूनियर विश्व वुशु चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था. एशियन गेम्स के लिए चयन प्रक्रिया आसान नहीं थी.

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एशियन गेम्स के लिए राजस्थान की पहली वुशु खिलाड़ी का चयन

राजस्थान की पहली बार राज्य की किसी महिला या पुरुष वुशु खिलाड़ी का चयन एशियन गेम्स के लिए हुआ है. कोटा की महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी की खिलाड़ी दिव्यांशी ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. उनका चयन एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में किया गया है. इसके साथ ही दिव्यांशी 23 से 30 जून तक चीन के हुबेई प्रांत में आयोजित होने वाली SCO वुशु चैंपियनशिप में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. वुशु एसोसिएशन के महासचिव अशोक गौतम ने बताया कि एशियन गेम्स के लिए चयनित भारतीय टीम के खिलाड़ियों का तकनीकी सुधार और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण शिविर 1 जुलाई से 31 जुलाई तक चीन में आयोजित किया जाएगा.

राजस्थान की तरफ से हासिल किए 12 स्वर्ण पदक

इससे पहले दिव्यांशी 10 अप्रैल से 10 मई तक गांधीनगर और 23 मई से 22 जून तक श्रीनगर में आयोजित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों में हिस्सा ले चुकी हैं. दिव्यांशी का राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है. उन्होंने राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए अब तक 12 स्वर्ण पदक जीते हैं. इनमें 4 बार सब-जूनियर, 3 बार जूनियर, 2 बार स्कूल गेम्स, 2 बार खेलो इंडिया, 1 बार फेडरेशन कप में स्वर्ण पदक शामिल हैं. इसके अलावा पिछले वर्ष उन्होंने सीनियर वर्ग में भी स्वर्ण पदक जीता था.

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वुशु फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित ओपन ट्रायल के जरिए आठ खिलाड़ियों का चयन किया गया. इसके बाद पिछले एक साल में हर दो महीने के अंतराल पर कुल पांच ट्रायल आयोजित हुए. अंतिम ट्रायल 5 से 8 जून तक श्रीनगर में हुआ. यहां 60 किलोग्राम भार वर्ग में दिव्यांशी ने शानदार प्रदर्शन किया. पहले मुकाबले में उन्होंने मणिपुर की भूमिका देवी को हराया. दूसरे मुकाबले में बड़ा उलटफेर करते हुए अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित और कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकी डीवाईएसपी रोशीबीना देवी को मात दी. 

दिवांशी के पिता भारतीय सेना हैं रिटायर

दिव्यांशी के कोच और कोटा वुशु संघ के सचिव अशोक गौतम ने बताया कि शुरुआती ट्रायल के समय दिव्यांशी का वजन 74 किलोग्राम था, जबकि एशियन गेम्स में केवल 52 और 60 किलोग्राम भार वर्ग शामिल थे. यही वजह रही कि वह पहली ट्रायल में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सकीं,, इसके बाद उन्होंने कड़ी मेहनत, अनुशासन और फिटनेस पर फोकस करते हुए करीब 14 किलो वजन कम किया और फिर खुद को चयन की दौड़ में मजबूती से स्थापित कर दिया.

दिव्यांशी 2017 से महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी में लगातार अभ्यास कर रही हैं. उनकी मां शशि प्रभा राजस्थान पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं और वर्तमान में कोटा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में कार्यरत हैं. उनके पिता सुनील कुमार सुंडा भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं. वुशु से जुड़े पदाधिकारियों का भी दिव्यांशी की सफलता में बड़ा योगदान रहा. बताया गया कि राजस्थान वुशु संघ के अध्यक्ष हीरानंद कटारिया के प्रयासों और वुशु फेडरेशन ऑफ इंडिया के सीईओ सोहेल अहमद के सहयोग से दिव्यांशी को तीसरी ट्रायल में मौका मिला, जिसका उन्होंने पूरा फायदा उठाया.

कोटा वुशु संघ के अध्यक्ष शिव भगवान गोदारा के मुताबिक, कोच अशोक गौतम ने वर्षों पहले ही दिव्यांशी की प्रतिभा को पहचान लिया था और कहा था कि वह एक दिन एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. अब उनका यह विश्वास सच साबित हुआ है. अशोक गौतम के मार्गदर्शन में बॉक्सिंग और वुशु के कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं. कॉमनवेल्थ स्तर की बॉक्सर अरुंधति चौधरी भी उनकी शिष्या रह चुकी हैं. भारतीय टीम के कोच और अंतरराष्ट्रीय निर्णायक राजेश कुमार टेलर ने दिव्यांशी को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें अब अपनी तैयारी को और मजबूत करना चाहिए ताकि एशियन गेम्स में देश के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया जा सके. गौरतलब है कि एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 22 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान में होना है. 

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