Census 2026: राजस्थान में 1 जनवरी से जनगणना की प्रक्रिया के चलते सभी प्रशासनिक यूनिट फ्रीज हो गई हैं. इसके साथ ही नए जिले, उपखंड, तहसील, गांव और वार्ड बनाने तथा उनकी सीमाओं में किसी भी तरह के बदलाव पर रोक लग गई है. सरकार के निर्देशों के अनुसार गांव या शहर के किसी भी वार्ड की सीमा में कोई फेरबदल नहीं किया जा सकेगा. यह रोक 2027 में मई-जून तक जनगणना का काम पूरा होने तक प्रभावी रहेगी. जनगणना पूरी होने के बाद ही गृह मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी कर रोक हटाई जाएगी.
नए साल से लाखों अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफरों पर भी जनगणना पूरी होने तक अगले करीब सवा साल तक रोक लगा दी गई है. कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, शहरी निकायों के आयुक्त, जनगणना में प्रगणक के रूप में लगाए जाने वाले शिक्षक, पटवारी और ग्राम सचिव इस दायरे में आएंगे.
नए साल से यह रोक फिर प्रभावी हो गई है
गृह मंत्रालय पहले 31 दिसंबर तक नई प्रशासनिक यूनिट बनाने पर लगी रोक हटा चुका था लेकिन अब नए साल से यह रोक फिर प्रभावी हो गई है. जनगणना के हिसाब से जिले, तहसील, उपखंड, गांव, शहरी निकायों और शहरी वार्डों की सीमाएं तय कर दी गई हैं, जिन्हें जनगणना पूरी होने तक बदला नहीं जा सकेगा. सभी प्रशासनिक यूनिट जनगणना पूरी होने तक 31 दिसंबर की स्थिति में ही बनी रहेंगी.
अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग शुरू होगी
फरवरी महीने से जनगणना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग शुरू होगी. जनगणना के काम में 2 लाख से अधिक अधिकारी और कर्मचारी लगाए जाएंगे. घर-घर जाकर जनगणना करने के लिए करीब 1 लाख 60 हजार प्रगणक तैनात होंगे, जबकि 30 से 40 हजार सुपरवाइजर और अन्य अधिकारी जिम्मेदारी संभालेंगे. जनगणना से जुड़े कर्मचारियों के ट्रांसफर केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किए जा सकेंगे.
जनगणना दो चरणों में होगी. पहले चरण में 15 मई से 15 जून तक प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की सूची तैयार करेंगे. इससे पहले दो से तीन महीने तक तैयारी और प्रशिक्षण का दौर चलेगा. एक प्रगणक को लगभग 150 घरों की जिम्मेदारी दी जाएगी.