बांसवाड़ा पंचायत समिति इन दिनों किसी विकास कार्य को लेकर नहीं, बल्कि 'एक कुर्सी, दो बीडीओ' की वजह से सुर्खियों में है. राज्य सरकार के तबादला आदेश, न्यायालय के स्थगन आदेश और एक ही पद पर दो अधिकारियों की मौजूदगी ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है. हालांकि, दोनों अधिकारी किसी भी तरह के विवाद से इनकार कर रहे हैं. राज्य सरकार की हालिया तबादला सूची में पंचायत समिति बांसवाड़ा के बीडीओ मनोज दोसी का तबादला कर उनकी जगह नरेंद्र तेली को नया ब्लॉक विकास अधिकारी नियुक्त किया गया. नियुक्ति आदेश जारी होने के बाद नरेंद्र तेली ने पदभार ग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी.
एक ने कोर्ट से लिया स्टे
इसी बीच मनोज दोसी ने अपने तबादला आदेश को न्यायालय में चुनौती दी और वहां से स्टे (स्थगन) आदेश प्राप्त कर वापस लौट आए. यहीं से पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया. सरकार के आदेश से नियुक्त नए बीडीओ और कोर्ट के स्टे के साथ लौटे पुराने बीडीओ की मौजूदगी ने पंचायत समिति में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी. जिलेभर में यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर एक ही कुर्सी पर अधिकार किसका होगा.
एक साथ चाय पीते नजर आए दोनों
मामले की सच्चाई जानने के लिए एनडीटीवी की टीम पंचायत समिति पहुंची. वहां का नजारा चर्चाओं से बिल्कुल अलग था. दोनों बीडीओ मनोज दोसी और नरेंद्र तेली एक साथ बैठे चाय पीते और सामान्य बातचीत करते नजर आए. जब दोनों अधिकारियों से एक ही पद पर दो बीडीओ होने और कथित खींचतान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके बीच किसी प्रकार का विवाद नहीं है. दोनों का कहना था कि वे आपसी समन्वय और सहमति से काम कर रहे हैं, खींचतान जैसी बातें सही नहीं हैं.
सरकारी तबादला आदेश और न्यायालय के स्टे के चलते एक ही पद पर दो अधिकारियों की स्थिति सामान्यतः कम देखने को मिलती है. यही वजह है कि यह मामला सिर्फ पंचायत समिति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे बांसवाड़ा में चर्चा का विषय बन गया.
हालांकि, सरकार के तबादला आदेश और न्यायालय के स्थगन आदेश के बीच बनी यह स्थिति प्रशासनिक रूप से पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है. अब सभी की नजरें संबंधित विभाग और न्यायालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि पंचायत समिति बांसवाड़ा में बीडीओ की कुर्सी पर अंतिम रूप से जिम्मेदारी किसके पास रहेगी.
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