128 साल की परंपरा टूटी, राजस्थान के बारां शहर में इस साल नहीं निकलेगी गणगौर की शोभायात्रा; जानें वजह

Baran Gangaur Festival 2026: राजस्थान के बारां में 128 साल पुराना इतिहास टूटने जा रहा है. इस साल 'गणगौर शोभायात्रा' नहीं निकालने का फैसला लिया गया है. जानें क्या है गणगौर सेवा समिति का पूरा निर्णय और महिलाओं की मायूसी की वजह. (अर्जुन अरविंद की रिपोर्ट)

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बारां में थमा इतिहास: 128 साल में पहली बार नहीं निकलेगी गणगौर की सवारी, बजट के अभाव में टूटा महिलाओं का उत्साह; जानें क्या है पूरा विवाद? (फाइल फोटो)
NDTV Reporter

Baran News: राजस्थान के बारां में 128 सालों से चली आ रही है गणगौर शोभायात्रा की परंपरा टूट रही है. महंगाई और नगर परिषद से प्रस्तावित अनुदान की राशि नहीं मिलने के कारण गुरुवार को बारां शहर में गणगौर शोभायात्रा नहीं निकलेगी. यह खबर बारां की उन महिलाओं को मायूस करने वाली है, जो ईसर गणगौर की पूजा अर्चना करती हैं, गणगौर माता की शोभायात्रा के दर्शन करने के लिए उत्साहित रहती हैं. 

किसने और क्यों लिया यह फैसला?

गणगौर शोभायात्रा इस साल नहीं निकालने का फैसला गणगौर सेवा समिति ने ले लिया है. गणगौर सेवा समिति की हाल में बैठक हुई, अध्यक्षता दिनेश गौतम ने की. बैठक में गणगौर शोभायात्रा पर विचार विमर्श किया. पदाधिकारियों ने कहा कि महंगाई की मार और नगर परिषद द्वारा प्रस्तावित अनुदान नहीं दिया जा रहा है. समिति अध्यक्ष दुष्यंत शर्मा और संरक्षक ललित मोहन खंडेलवाल ने बताया कि शोभायात्रा के लिए दो से ढ़ाई लाख रुपए खर्च होते हैं. बारां के बाजार से चंदा एकत्रीकरण के साथ नगर परिषद के सहयोग से पूर्ण हो पाता था. नगर परिषद से अनुदान राशि नहीं मिलने की वजह से करीब 128 साल से निकाली जाने वाली राजस्थान के लोक पर्व गणगौर शोभायात्रा इस साल नहीं निकालने का निर्णय लिया है.

इस बैठक में कौन-कौन मौजूद था?

बारां शहरवासियों को मायूस कर देने वाली इस बैठक में गणगौर सेवा समिति के सदस्यों में रामभरोस सेन, बुद्धिप्रकाश जोशी, मनोज शर्मा, विनोद पंडित, महेश सोनी, ललित शर्मा लाला, गोविंद सोनी, गोविंद पंडित, राम श्याम अवस्थी, बब्बू ठाकुर, ललित गुप्ता, हेमराज, गोपाल, सुरेश, शंभू सिंह तंवर, अशोक, अनिल पंडित, सुरेंद्र, राकेश जैन, आयुष पार्षद, सोनू, हितेश गुप्ता, विवेक, नरेश, विपुल आदि मौजूद रहे.

इस साल गणगौर किस तारीख को है?

इस बार गणगौर 21 मार्च को मनाई जाएगी. महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए गणगौर का व्रत करती हैं. ईसर गणगौर की पूजा करती हैं. तरह-तरह के पकवान बनाती हैं. धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए 16 दिनों तक कठोर तपस्या की थी. उनकी इसी अटूट श्रद्धा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया. इसी कारण से यह पर्व 16 दिनों तक मनाया जाता है और हर पूजा सामग्री 16 की संख्या में अर्पित की जाती है.

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