Baran Garlic GI Tag: राजस्थान के हाड़ौती संभाग में स्थित बारां जिले का लहसुन अब अपनी खुशबू और तीखे स्वाद से दुनिया भर के बाजारों को महकाने की तैयारी में है.यहां के लहसुन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी डिमांड रहती है. इसी को चलते राज्य सरकार के निर्देश पर बारां कृषि उपज मंडी प्रशासन ने यहां के लहसुन को जीआई टैग (Geographical Indication Tag) दिलाने के लिए जियोग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री संस्था में औपचारिक आवेदन कर दिया है. यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो आने वाले समय में बारां का लहसुन एक ग्लोबल ब्रांड के रूप में उभरेगा.
60 हजार हेक्टेयर में लहसुन की बंपर पैदावार
इस साल बारां जिले में करीब 60000 हेक्टेयर में किसानों ने लहसुन की पैदावार की है और इस व्यापारिक फसल से किसानों को मुनाफे की बड़ी उम्मीद रहती है. फिलहाल मंडी में ₹8000 लेकर 14000 रुपए क्विंटल तक के भाव से लहसुन बिक रहा है. किसानों ने उम्मीद जताई है कि अगर लहसुन को जीआई टैग मिलता है तो उन्हें सबसे ज्यादा फायदा होगा. उनके लहसुन का निर्यात बढ़ेगा
क्यों खास है बारां का लहसुन?
किसानों के अनुसार, बारां की धरती में पैदा होने वाले लहसुन की दो मुख्य विशेषताएं इसे दुनिया भर से अलग बनाती हैं. यहां के लहसुन का तीखापन और स्वाद अन्य क्षेत्रों के मुकाबले बेहतर माना जाता है. इस लहसुन को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जिससे यह निर्यात के लिए सबसे उपयुक्त है.वर्तमान में यहां का अधिकांश लहसुन खाड़ी देशों (Gulf Countries) में निर्यात किया जाता है. जीआई टैग मिलने के बाद यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों में भी इसकी मांग बढ़ने की प्रबल संभावना है.
प्रशासनिक प्रक्रिया और भविष्य की उम्मीद
कृषि उपज मंडी के सेक्रेटरी हरिमोहन बेरवा का कहना है कि ज्योग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री ने बारां में पैदा होने वाली लहसुन की फसल को GI टैग दिलाने के लिए कोशिशें शुरू कर दी हैं. सरकार के निर्देश पर अप्लाई किया गया है. अप्लाई करने के बाद ज्योग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री की तरफ से कुछ सवाल पूछे गए हैं, जिन्हें पूरा करने का प्रोसेस चल रहा है. GI टैग मिलने में करीब एक से डेढ़ साल का समय लगता है. उन्होंने कहा कि पूरी उम्मीद है कि बारां जिले के लहसुन को GI टैग मिलेगा.इस तरह यहां का लहसुन ग्लोबल ब्रांड बनेगा.
Report: Arjun Arvind
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