राजस्थान के बारां में खाद की 'मारामारी' जारी, किसान परेशान; खरीफ के बाद रबी की फसल पर भी संकट!

Baran Fertilizer Crisis: सवाल यह है कि अगर अधिकारियों के पास खाद का स्टॉक पर्याप्त है, तो उन्हें कालाबाजारी रोकने के लिए इतने सख्त कदम क्यों उठाने पड़ रहे हैं?

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इस साल भी बारां में किसानों का 'खाद' के लिए संघर्ष जारी, किसानों की लंबी कतारें, हाथ खाली!
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान के बारां जिले के किसानों के लिए इस बार की खरीफ की फसल एक नई मुसीबत लेकर आई है. अच्छी बारिश और भरपूर पैदावार की उम्मीद के बीच, यूरिया खाद की भारी किल्लत ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है. हालत यह है कि एक बोरी यूरिया के लिए भी किसानों को घंटों तक सहकारी समितियों के बाहर लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है. प्रशासन आधार कार्ड या जमीन के दस्तावेज देखकर ही खाद दे रहा है, लेकिन बावजूद इसके, किसानों को मनचाही मात्रा नहीं मिल पा रही है. और तो और, कुछ डीलरों पर निर्धारित मूल्य से ज्यादा पैसे वसूलने के आरोप भी लग रहे हैं. किसानों का साफ कहना है कि सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क है.

रबी की फसल पर मंडराता 'काला' साया

किसानों को असल चिंता आने वाली रबी की फसल की है. सितंबर के अंत और अक्टूबर की शुरुआत में जब गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलें बोई जाएंगी, तब डीएपी और यूरिया की मांग आसमान छूएगी. किसानों को डर है कि कहीं उस वक्त भी उन्हें खाद के लिए इसी तरह की मारामारी न करनी पड़े. 

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अधिकारियों ने कहा- खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध

हालांकि, बारां के कृषि विभाग के अधिकारी इस आशंका को सिरे से खारिज कर रहे हैं. NDTV से बात करते हुए कृषि विभाग के जेडी एग्रीकल्चर अधिकारी धनराज मीणा ने बताया कि उनके पास खाद की पर्याप्त मात्रा है और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध करा दिया जाएगा.

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अगस्त महीने में डीएपी का 3000 एमटी आवंटन था, जिसके मुकाबले 6183 एमटी की आपूर्ति की गई है. इसी तरह, यूरिया का 13000 एमटी आवंटन था, जिसमें से 11489 एमटी की आपूर्ति हुई है. उन्होंने यह भी बताया कि सितंबर महीने के लिए यूरिया और डीएपी, दोनों का 12000-12000 एमटी आवंटन है और अतिरिक्त मांग भी भेजी जा चुकी है.

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मामले से जुड़े बड़े सवाल

Q1: बारां में खाद की किल्लत क्यों हो रही है?
A: अधिकारियों के अनुसार, यह आपूर्ति और मांग के बीच के अंतर के कारण होता है, लेकिन किसान इसे कालाबाजारी का परिणाम मानते हैं, जो मध्य प्रदेश से सटे बॉर्डर पर होती है.

Q2: क्या रबी की फसल के लिए डीएपी और यूरिया की कमी होगी?
A: कृषि विभाग का दावा है कि उनके पास पर्याप्त स्टॉक है और कमी नहीं होगी, लेकिन किसानों को इसकी आशंका है.

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Q3: कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने क्या किया है?
A: जिला प्रशासन ने मध्य प्रदेश से सटी सीमा पर 8 चेक पोस्ट बनाए हैं ताकि खाद की अवैध निकासी को रोका जा सके.

Q4: अगर कोई डीलर ज्यादा दाम वसूलता है तो किसान क्या करें?
A: किसानों को तुरंत इसकी शिकायत कृषि विभाग के अधिकारियों या संबंधित उपखंड अधिकारी से करनी चाहिए.

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Q5: क्या यह समस्या हर साल आती है?
A: जी हां, बारां में हर साल फसल बुवाई के समय खाद की किल्लत और कालाबाजारी की खबरें आती हैं.

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कालाबाजारी का 'गढ़' बना बॉर्डर?

बारां जिले की 50 प्रतिशत से ज्यादा सीमा मध्य प्रदेश से सटी हुई है. इसी का फायदा उठाकर कुछ खाद माफिया राजस्थान से सस्ती दर पर खाद खरीदकर ऊंचे दामों पर मध्य प्रदेश में बेच देते हैं. यह अवैध व्यापार वर्षों से चल रहा है और यही बारां के किसानों की परेशानी का सबसे बड़ा कारण है.

8 जगह चेक पोस्ट, 24 घंटे निगरानी

अब जाकर, जिला प्रशासन ने इस समस्या पर लगाम लगाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं. कृषि विभाग को आदेश दिया गया है कि वह कालाबाजारी को रोके. इसी कड़ी में, विभाग ने जिले में 8 प्रमुख जगहों पर चेक पोस्ट स्थापित किए हैं. ये चेक पोस्ट छबड़ा, छीपाबड़ौद, अटरू, मांगरोल, शाहाबाद, किशनगंज, रामगढ़ और बारां चौकी पर बनाए गए हैं. इन चौकियों पर संबंधित उपखंड अधिकारी, थाना प्रभारी और कृषि विभाग के पर्यवेक्षक 24 घंटे निगरानी रखेंगे.

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