खेतों में ऑयल के रिसाव का मुद्दा सदन में गूंजा, हरीश चौधरी बोले- गांवों में ब्लास्टिंग से मुसीबत खड़ी हुई

बाड़मेर जिले के कवास क्षेत्र में एक किसान के खेत में करीब 3 दिन तक क्रूड ऑयल का अनियंत्रित रिसाव जारी रहा. इससे आसपास के क्षेत्र में भी लोग चिंतित हो गए.

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बाड़मेर में एक खेत में क्रूड ऑयल का रिसाव के दौरान की तस्वीरें

बायतू से कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने विधानसभा में मंगला और ऐश्वर्या ऑयल फील्ड क्षेत्र में पर्यावरणीय संकट का मुद्दा उठाया. स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से उन्होंने ऑयल फील्ड क्षेत्र में लगातार हो रही ब्लास्टिंग, भूमि धंसाव और क्रूड ऑयल रिसाव की शिकायतों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय ग्रामीणों, किसानों और सार्वजनिक ढांचों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है. पिछले कुछ वर्षों से छीतर का पार, काऊखेड़ा, कवास सहित आसपास के गांवों में भू-कंपन और विस्फोट गतिविधियों से नुकसान हुआ है.  

कवास क्षेत्र में क्रूड ऑयल रिसाव ने बढ़ाई चिंता

उन्होंने बताया कि 24 फरवरी 2026 को कवास स्थित ऐश्वर्या ऑयल फील्ड के वेलपैड-8 के समीप एक कृषक की भूमि में अचानक दरार उत्पन्न होने के बाद कच्चे तेल का रिसाव शुरू हो गया. यह 48 घंटे से अधिक समय तक पूर्ण रूप से नियंत्रित नहीं किया जा सका. 

तेल के बहाव को रोकने के लिए लगभग 100 मीटर लंबी अस्थायी नाली बनाकर तेल को मोड़ा गया और वैक्यूम टैंकरों के माध्यम से संग्रहण किया गया. उन्होंने कहा कि एहतियातन उत्पादन बंद किया गया. लेकिन रिसाव के वास्तविक स्रोत की तत्काल पहचान नहीं हो पाना सुरक्षा और आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर प्रश्न खड़े करता है.

ग्रामीण ढांचे, कृषि भूमि एवं जल स्रोतों पर खतरा

कांग्रेस विधायक का कहना है कि भूजल एवं पेयजल स्रोतों के प्रदूषण का खतरा बना हुआ है. इससे ग्रामीणों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष जोखिम की स्थिति उत्पन्न हो रही है. पहले भी सर्वेक्षण हुआ, लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं, जिससे स्थानीय जनता में अविश्वास और चिंता बढ़ रही है. उन्होंने सभी सर्वेक्षण और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की. साथ ही कहा कि मृदा, भूजल एवं पर्यावरणीय प्रभाव का थर्ड-पार्टी ऑडिट कराया जाए.  

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