Rajasthan: सीएम भजनलाल ने पलटा गहलोत सरकार का एक और फैसला, JNVU शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच जारी रखेगी ACB

हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ तत्कालीन वसुंधरा सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2017 में आदेश दिया कि एंटी करप्शन ब्यूरो की तफ्तीश जारी रहेगी. लेकिन साल 2023 में पूर्ववर्ती गहलोत सरकार जांच को बंद करने के लिए एसएलपी को वापस लेने की अर्जी लगाई थी.

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जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय (Jai Narayan Vyas University) में कथित रूप से हुए 154 शिक्षक भर्ती घोटाले (Jai Narayan Vyas University Teacher Recruitment Scam) मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के द्वारा आचार संहिता लगने से मात्र 2 दिन पहले लिए गए फैसले को पलट दिया है.

दरअसल मामले के अनुसार उच्चतम न्यायालय में दायर एसएलपी पर जेएनवीयू  शिक्षक भर्ती घोटाले की FIR एसीबी में दर्ज हुई थी, जहां प्रदेश की पूर्ववर्ती गहलोत सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान 6 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय में एसएलपी को विड्रॉ करने की अर्जी पेश की थी. जिसे भजनलाल सरकार ने गुरुवार को वापस ले लिया.

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दरअसल 2013 में विश्विद्यालय में शिक्षक भर्ती हुई थी. जिसमें यह आरोप लगे की भर्ती के दौरान पात्रता को दरकिनार किया गया. इसकी जांच एंटी करप्शन ब्यूरो कर रहा था. जिसे गहलोत सरकार ने रोक दिया था. आचार संहिता से 2 दिन पहले लिए गए निर्णय पर भाजपा ने कांग्रेस की आलोचना की थी. 

पूर्व वीसी/एमएलए भी मामले में जा चुके हैं जेल

जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय में साल 2013 में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले के मामले में पूर्व कुलपति प्रोफेसर भंवर सिंह राजपुरोहित के अलावा पूर्व सिंडिकेट सदस्य रहे पूर्व विधायक जुगल काबरा जेल जा चुके हैं. पूर्व में वसुंधरा सरकार ने इस पूरे मामले में जांच को और आगे बढ़ते हुए कार्रवाई में भी सख्ती बरतने की बात कही थी. इसके बाद एसीबी ने भी कार्रवाई में तेजी लाई थी.

आदेश के बाद अब जांच में आएगी और तेजी

वर्तमान में प्रदेश के भजनलाल सरकार के इस आदेश के बाद अब शिक्षक भर्ती घोटाले मामले की जांच में तेजी आएगी,जहां इस पूरे मामले में तत्कालीन कुलपति बीएस राजपुरोहित, प्रो.आरएन प्रसाद के अलावा कला संकाय के पूर्व अधिष्ठान नरेंद्र अवस्थी के अलावा अन्य ने भी पूर्व में उच्च न्यायालय में आपराधिक विविध याचिका दायर कर उनके खिलाफ दायर की गई FIR को चुनौती दी थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने एसीबी की एफआईआर रद्द करने के आदेश दिए थे.

हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ तत्कालीन वसुंधरा सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी. उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2017 में आदेश दिया कि एंटी करप्शन ब्यूरो की तफ्तीश जारी रहेगी. लेकिन साल 2023 में पूर्ववर्ती गहलोत सरकार जांच को बंद करने के लिए एसएलपी को वापस लेने की अर्जी लगाई थी.

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