भरतपुर में खनन के लिए ब्लास्टिंग से मकानों में आईं दरारें, सांसद संजना जाटव की मौजूदगी में महापंचायत का बड़ा फैसला

भरतपुर के वैर इलाके में चारागाह की जमीन पर खनन के खिलाफ ग्रामीणों का करीब 40 दिनों से धरना जारी है. लोगों को कहना है कि खनन के लिए हो रही ब्लास्टिंग की वजह से मकानों में दरारें आ गईं हैं. इसी के बाद महापंचायत आयोजित की गई.

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चारागाह की जमीन पर खनन के खिलाफ महापंचायत

Rajasthan News: भरतपुर के वैर इलाके में चारागाह की जमीन पर अवैध कब्जा और खनन के लिए हो रही ब्लास्टिंग को लेकर ग्रामीण 40 दिन से धरना दे रहे हैं, लेकिन अभी तक ग्रामीणों की कोई सुनवाई नहीं हुई है. अब ग्रामीणों द्वारा एक महापंचात का आयोजन किया गया. जिसमें भरतपुर की सांसद संजना जाटव और धौलपुर करौली सांसद भजन लाल जाटव ने हिस्सा लिया. ग्रामीणों ने इस महापंचायत में निर्णय लिया कि जब तक इस भूमि को मुक्त नहीं किया जाएगा, तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा. ग्रामीणों का कहना है कि खनन के लिए हो रही ब्लास्टिंग की वजह से ग्रामीणों के मकान में दरारें आ रही हैं.

रास्ता बंद होने से खनन कार्य रुका

फसलों पर जमी धूल फसलों को नुकसान पहुंचाती है. ग्रामीणों का आरोप है कि लीज की आड़ में अवैध खनन किया जा रहा है. खनन कार्य के दौरान आने जाने वाले वाहनों को रोकने के लिए ग्रामीणों ने जेसीबी से रास्ते को बंद कर दिया. जिसके चलते खनन कार्य पूर्ण रूप से बंद है.

खनन कार्य के लिए सरकार ने जारी किया था पट्टा

भरतपुर खनिज विभाग द्वारा जिला पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर बताया गया कि राज्य सरकार और खनिज विभाग को खनन बंद होने से राजस्व की हानि हो रही है. ग्रामीण जिस अवैध खनन कार्य को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे उस खनन कार्य के लिए राज्य सरकार ने 3/1993 नंबर का पट्टा जारी कर रखा है. लेकिन खनन कार्य बंद करने से राज्य सरकार और खनिज विभाग को राजस्व की हानि हो रही है. 

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भौडा गांव के रहने वाले राजू नावर ने बताया कि बयाना के एक व्यक्ति द्वारा भौंडागांव की चारागाह भूमि पर वैर विधानसभा क्षेत्र में लगातार 13 वर्षों से लगभग 40 हेक्टेयर यानी 252 बीघा ज़मीन में अवैध खनन कार्य चल रहा है.

दर्जनों गांवों के लोगों का चल रहा आंदोलन

वैर विधानसभा के दर्जनों गांव भोंडागांव, रायपुर, सीता, हाथौडी, जहाज, कारवांन, बदनपुरा और राजगढ़ सहित दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीणों की चरागाह भूमि में अवैध खनन और प्रदूषण के ख़िलाफ़ आंदोलन चल रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक यह लीज रद्द और चारागाह भूमि घोषित नहीं की जाएगी. तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा. एक और ग्रामीण राम सिंह ने बताया कि लीज पर जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है. इसलिए उन्होंने चारागाह की जमीन काटकर रास्ता बना लिया है, जिसके कारण ग्रामीण अपने पशुओं का रखरखाव भी नहीं कर पा रहे.

बता दें कि राजस्थान सरकार और जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वाशन नहीं मिला है. खनन से प्रतिवर्ष राजस्थान सरकार को 4 करोड़ 98 हजार 5200 रुपए और प्रति माह 5 करोड़ रुपए का राजस्व खनिज विभाग को मिलता है, लेकिन 17 दिसंबर 2024 से खनिज कार्य बंद होने से राज्य सरकार और खनिज विभाग को राजस्व की हानि हो रही है. जिला कलेक्टर के द्वारा मीटिंग में 8 जनवरी 2025 को रास्ता खुलवाने के निर्देश दिए गए. साथ ही खनन पट्टा क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की जाए जिससे कोई अप्रिय घटना ना हो.

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