भीलवाड़ा के जिस सरकारी अस्पताल में 5 महिलाओं की मौत, उसका ऑपरेशन थिएटर दो बार जांच में फेल

राजस्थान के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में डिलीवरी के बाद महिलाओं के मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है. कोटा, बीकानेर के बाद भीलवाड़ा जिले में प्रसूताओं की मौत के आंकड़े ने स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
भीलवाड़ा के सरकारी अस्पताल में 5 महिलाओं की मौत का जिम्मेदार कौन?

राजस्थान में भीलवाड़ा के सरकारी अस्पताल में पिछले एक सप्ताह में 5 महिलाओं की मौत के मामले आए हैं. इन 5 मामलों में 4 महिलाएं प्रसूता थीं. इसके बाद चिकित्सा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. NDTV की टीम इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए भीलवाड़ा के सरकारी अस्पताल पहुंची तो एक बात सामने आई कि अस्पताल में दो ऑपरेशन थिएटर हैं. 29 जून को दोनों की कल्चर रिपोर्ट सामने आई. इस रिपोर्ट में एक ऑपरेशन थिएटर पॉजिटिव आया, हालांकि इसे तभी से बंद किया गया है. इसके बाद दोबारा इसकी जांच हुई तो फिर से रिपोर्ट पॉजिटिव आई. आज करीब 14 दिन बाद तीसरी बार जांच करवाने पर यह ऑपरेशन थिएटर ऑपरेशन के लिए ठीक हुआ है. हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस ऑपरेशन थिएटर में एक ऑपरेशन नहीं हुआ है. 

हमनें मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ से महिलाओं की मौत पर कई सवाल किए.  जिस पर उन्होंने विस्तार से जवाब दिए हैं.

Advertisement

सवाल 1 : महिलाओं की मौत के क्या कारण रहे?
जवाब:- अधीक्षक ने बताया कि पांच महिलाओं में से एक महिला गर्भवती नहीं थी. फोरी देवी को 30 जून को बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए भर्ती किया गया था. उनका ऑपरेशन 1 जुलाई को किया गया, उनकी मौत 7 जुलाई को मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (हृदयाघात) के कारण हुई.

दूसरी मरीज शिमला गुर्जर 5 जुलाई को उप-जिला चिकित्सालय, गुलाबपुरा से गंभीर बीमारी के कारण रेफर हो आई थी. हॉस्पिटल में उनका किसी भी प्रकार का ऑपरेशन नहीं किया गया. 7 जुलाई 2026 को हाइपोवोलेमिक शॉक, तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस, सेप्टीसीमिया, IUD और एनीमिया जैसी गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं के कारण हुई.

तीसरी मरीज ईशा पाण्डेय को 5 जुलाई को भर्ती किया गया और 6 जुलाई को ऑपरेशन किया गया. उनकी मौत 8 जुलाई 2026 को पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म के कारण हुई.

दिव्या सेन को 7 जुलाई 2026 को सीएचसी रायपुर से रेफर कर भर्ती किया गया. उसी दिन ऑपरेशन किया गया 9 जुलाई को गर्भावस्था जनित गंभीर उच्च रक्तचाप के कारण उत्पन्न HELLP सिंड्रोम (Hemolysis, Elevated Liver Enzymes औऱ Low Platelet Count) तथा एक्लेम्प्सिया जैसी 
गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं के कारण मौत हुई.

Advertisement

वहीं, पांचवीं मरीज संगीता जीनगर को 9 जुलाई 2026 को भर्ती किया गया. उसी दिन ऑपरेशन किया गया. उनकी मौत 10 जुलाई को प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव (Atonic Post Partum Haemorrhage with DIC) के कारण हुई. 

अधीक्षक ने बताया कि किसी भी मौत का संबंध ऑपरेशन थिएटर के संक्रमण से नहीं है. 

सवाल 2: ऑपरेशन थिएटर की जांच हुई? ऐसे क्या कारण रहे कि दो बार जांच पर भी OT की रिपोर्ट पॉजिटिव आई?

जवाब: अधीक्षक ने बताया कि ऐसे कई कारण हो सकते हैं. किसी उपकरण में संक्रमण हो सकता है या कोई और कारण भी इसका हो सकता है. जरूरी यह है कि हमें इसका संज्ञान लेना था और हमने संज्ञान लिया. उसे ऑपरेशन थिएटर को बंद किया. वहां पर स्टेरलाइजेशन किया गया. आज उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है  इसके बाद ही उसे खोला जाएगा. 

Advertisement

सवाल 3: वाइटल्स चेक करने के बाद ही प्रोसेस किया होगा?

जवाब : जी, बिल्कुल सभी ऑपरेशन पहले जांच करने के बाद ही किए जाते हैं. जांच में संतुष्टि के बाद ही ऑपरेशन किया जाता है. 

सवाल 4: अस्पताल में कुल कितने ऑपरेशन होते हैं? कुल कितनी डिलीवरी होती हैं? 

जवाब : अधीक्षक ने बताया कि सालाना करीब 16 - 17 हजार डिलेवरी इस अस्पताल में होती है. पूरे जिले की 40 से 50% डिलेवरी अकेले अस्पताल में होती है. करीब 5 से 6 हजार सिजेरियन डिलीवरी होती है. 40 प्रतिशत डिलीवरी रात में होती है. 

सवाल : 5 परिजनों ने लापरवाही और सही बर्ताव न करने के आरोप लगाए हैं? 

जवाब : अधीक्षक ने कहा कि इसके लिए राज्यस्तरीय कमेटी जांच करने आई थी. उन्होंने ऑपरेशन थिएटर में, सभी स्टाफ से और अन्य लोगों से पूछताछ की है. 

अस्पताल प्रशासन इस पूरे मामले में खुद को क्लीन चिट दे चुका है. वही, राज्यस्तरीय कमेटी जांच करके अपनी रिपोर्ट उच्च स्तरीय अधिकारियों को प्रेषित करेगी. लेकिन कई सवाल है जो चिकित्सा व्यवस्थाओं पर और चिकित्सकों की संवेदना पर खड़े होते हैं. 

सबसे बड़ा सवाल तो यही खड़ा होता है कि यदि महिलाएं किसी मेडिकल कंडीशंस के साथ आई थी. ऑपरेशन से पहले उनकी जांच की गई थी. रिपोर्ट सामान्य आने पर ऑपरेशन किया गया तो अब उस मेडिकल कंडीशन को कारण कैसे बताया जा सकता है? और यदि मेडिकल कंडीशन सही नहीं थी तो ऑपरेशन करने के लिए आगे  क्यों बढ़े?

हालांकि अधीक्षक ने इस बात का जवाब दिया कि सभी प्रस्ताव की जांच करने के बाद संतुष्टि मिलने पर ही ऑपरेट किया जाता है. सभी महिलाओं में जो स्थिति आई है वह पोस्ट ऑपरेशन सिम्टम्स है. ऐसे में उनका सटीक आंकलन करना मुश्किल होता है.

यह भी पढे़ं-

सरकारी अस्पताल में हाई वोल्टेज से उड़ गए उपकरण, बत्ती हुई गुल, अब टॉर्च से हो रहा इलाज

'किडनी नहीं बदली तो बंद कर दूंगी डायलिसिस', कोटा में 5 प्रसूताओं ने 5 मांगों के लिए दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम