राजस्थान के भीलवाड़ा में हर दिन मिल रहा नया एड्स का रोगी, अब तक मिले 6314 HIV पॉजिटिव; यह है बड़ी वजह 

भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज के आंकड़े बता रहे हैं कि हर दिन एक नया रोगी सामने आ रहा है. भीलवाड़ा में अब तक 6317 रोगी सामने आ चुके हैं.

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भीलवाड़ा में अब तक 6317 रोगी सामने आ चुके हैं.

World AIDS Day 2025: मेवाड़ अंचल के कई जिले ऐसे हैं जहां से रोजी-रोटी के लिए युवा परदेश पलायन करते हैं. परदेश से अनजाने अपने साथ जानलेवा एड्स की 'सौगात' भी परिवार को दे रहे हैं. भीलवाड़ा में जानलेवा एड्स के आंकड़े डरवाने होते जा रहे हैं. सरकारी दावा है कि एचआईवी एड्स नियंत्रण को लेकर लगातार पर प्रयास किए जा रहे हैं. स्कूल, कॉलेज ग्रामीण अंचल तक HIV  पर अंकुश के लिए कार्यशालाएं कराई जा रही हैं. उसके बावजूद कपड़ा नगरी में HIV का ग्राफ कम होने की बजाय बढ़ता जा रहा है.

भीलवाड़ा जिले में हर रोज मेडिकल कॉलेज में एक नया HIV पॉजिटिव सामने आ रहा है. ऐसे में तमाम संगठन मेडिकल हेल्थ से जुड़े हुए सरकारी विभागों की कार्यशीली पर प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं.

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457 से अधिक लोग अकाल मौत का शिकार

आज विश्व एड्स दिवस है. जानलेवा एड्स की चपेट में आने से 457 से अधिक लोग अकाल मौत का शिकार बन चुके हैं. एड्स दिवस पर मेडिकल हेल्थ विभाग के सामने आए आंकड़े डरावने हैं. भीलवाड़ा मेडिकल कॉलेज के आंकड़े बता रहे हैं कि हर दिन एक नया रोगी सामने आ रहा है. भीलवाड़ा में अब तक 6317 रोगी सामने आ चुके हैं. अभी भी भीलवाड़ा ओरेंज ज़ोन में है. रोजगार के लिए पलायन करने वाले परदेसी पावने भीलवाड़ा में एड्स के बढ़ते ग्राफ का एक बहुत बड़ा कारण बताया जा रहा है. 

क्या कहते हैं चिकित्सक ?  

महात्मा गांधी चिकित्सालय के अधीक्षक डॉक्टर अरुण गौड़ का कहना है कि जिला चिकित्सालय में एआरटी सेंटर संचालित हैं. हम काउंसलिंग करते हैं और जो पेशेंट पॉजिटिव पाए जाते हैं उनके उपचार के लिए बराबर व्यवस्था की जाती है. भीलवाड़ा हॉस्पिटल में हम हर रोज आने वाले मरीजों की जांच करते हैं.

क्या कहते हैं स्वयंसेवी संगठन?  

जिले में एड्स रोकथाम और उपचार के क्षेत्र में काम करने वाले स्वयंसेवी संगठन के भंवर जाट का कहना है कि हम लोग भीलवाड़ा नेटवर्क फोर पीपुल लिविंग विथ एचआईवी एड्स संस्थान के साथ काम कर रहे हैं. एड्स प्रभावित अधिकतर मामलों में कामकाज की तलाश में परदेश का रुख करने वाले लोग अपने साथ यह बीमारी ला रहे हैं. रोकथाम के लिए हम जागरूकता अभियान चला रहे हैं. 

''उसके बावजूद इस बीमारी का असर सामाजिक ताने-बाने पर भी देखने को मिल रहा है. कई परिवार ऐसे हैं जिसमें पुरुष के एचआईवी पॉजीटिव पाए जाने के बाद उसकी उसकी पत्नी छोड़कर जा चुकी है ऐसे कई उदाहरण मेरे पास में है जिसकी हम काउंसलिंग करके वापस परिवारों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं. 

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