भोमाराम ने बताया कि सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट उन्होंने स्वयं नहीं डाली थी, बल्कि साध्वी के पिता विरमनाथ के कहने पर पोस्ट की थी. उन्होंने कहा कि कुछ लोग मामले में सिर्फ राजनीति करने के लिए हंगामा कर रहे थे. गुरु महाराज का ऐसा कोई इरादा नहीं था कि साध्वी का पोस्टमार्टम न कराया जाए. भोमाराम ने बताया कि निजी अस्पताल में मौत के बाद जब साध्वी को आश्रम लाया गया, तब गुरु महाराज ने कहा था कि रात को पोस्टमार्टम संभव नहीं होता, इसलिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में साध्वी को सरकारी अस्पताल ले जाकर पोस्टमार्टम कराया जाएगा.
"गाड़ी तोड़ने का प्रयास किया"
साधु-संतों और गुरुजनों को सूचना देकर विधिवत प्रक्रिया की तैयारी की जा रही थी, लेकिन कुछ लोगों ने जानबूझकर माहौल खराब किया. उनकी गाड़ी के टायर की हवा निकाल दी. गाड़ी को तोड़ने का प्रयास किया गया.
"साध्वी न्याय की मांग कर रही थीं"
भोमाराम का कहना है कि जिन्होंने उस समय माहौल खराब किया, वे लोग साध्वी बाईसा की समाधि के दौरान नजर नहीं आए. उन्होंने यह भी बताया कि प्रेम बाईसा अपने वायरल वीडियो के बाद न्याय की मांग कर रही थीं. इसी क्रम में उन्होंने चारों शंकराचार्यों को पत्र लिखकर कहा था कि वे हर तरह की अग्नि परीक्षा देने को तैयार हैं, क्योंकि उनके अनुसार, बाईसा ने बचपन से लेकर अंतिम समय तक ब्रह्मचर्य का पालन किया था. यह पोस्ट भी विरमनाथ के कहने पर डाली गई थी.
साध्वी की मौत पर सवाल बने हुए हैं
भोमाराम ने बताया कि घटना वाले दिन वह दिल्ली जाने के लिए निकले थे, तभी झालामंड के पास गुरुदेव के फोन से सेवादार सुरेश का फोन आया कि बाईसा की तबीयत खराब हो गई है. आप हॉस्पिटल आओ, तब मैंने उनसे पूछा कौन से हॉस्पिटल आना है तो उन्होंने कहा प्रेक्षा हॉस्पिटल आ जाओ.
सूचना मिलते ही वे प्रेक्षा हॉस्पिटल पहुंचे, तब तक साध्वी प्रेम बाईसा का निधन हो चुका था. साध्वी प्रेम बाईसा की मौत को लेकर कई सवाल बने हुए हैं. फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी.
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