बीकानेर में गेहूं ने किसानों को रूलाया, एक महीने बाद भी खरीद ठप; कौड़ियों के दाम फसल बेचने को मजबूर

Rajasthan News: बीकानेर में सरकारी गेहूं खरीद में एक महीने की देरी से किसान परेशान हैं. उन्हें ओलावृष्टि से प्रभावित अपनी फसल खुले बाजार में कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

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बीकानेर गेहूं खरीद
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Bikaner Mandi News: बीकानेर में गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है.रबी सीजन की फसल आए एक माहीना बीत जाने के बावजूद अब तक सरकारी खरीद शुरू नहीं हो पाई है प्रशासन की इस घोर लापरवाही का सीधा खामियाजा उन किसानों को भुगतना पड़ रहा है, जो पहले ही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार झेल चुके हैं.ऐसे में खर्ज की मार से बचने के लिए किसान मजबूरी में अपनी मेहनत की फसल खुले बाजार में सस्ते दामों पर बेच को मजबूर हो रहे हैं.

बाजार में 'लूट' रहे किसान, प्रति क्विंटल भारी नुकसान

जानकारी के अनुसार, सरकारी खरीद शुरू न होने के कारण किसान अपनी उपज को खुले बाजार में बेचने को मजबूर हैं,  खुले बाजार में सस्ते दामों पर बेच रहे किसानों को प्रति क्विंटल 500 से 700 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है. पहले ही ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से फसल प्रभावित हो चुकी है. ऐसे में अब सरकारी खरीद में देरी ने किसानों की कमर तोड़ दी है.

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खुले बाजार में सस्ते दामों पर बेच रहे गेहूं
Photo Credit: NDTV

एक टोकन में 5 बोरी कैसे बिकेगी 

 किसानों का कहना है कि सरकार ने गेहूं बेचने के लिए टोकन की व्यवस्था तो शुरु कर दी है लेकिन इसकी प्रक्रिया के कारण यह बीच अधर में लटक गई है. दरअसल एक टोकन में 5 बोरी गेहूं की तोल किसानों के लिए घाटे का सौंदा साबित हो रही है . क्योंकि ज्यादातर किसानों के खेत में लगभग 200 क्विंटल गेहूं बोया जाता है.  वही गेहूं की गुणवत्ता को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे है. जिसके कारण किसान कम दाम पर इसे बेचने को लिए मजबूर हो गए है.  

 गेहूं की सरकारी खरीद जल्द हो शुरू 

इसी को लेकर किसानों ने सरकार से मांग की है कि तुरंत प्रभाव से गेहूं की सरकारी खरीद शुरू की जाए ताकि उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके.

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