बीकानेर खेजड़ी आंदोलन: सरकार के लिखित आश्वासन के बाद अनशन खत्म, जोधपुर-बीकानेर में कटाई पर पूर्ण रोक

बीकानेर में 4 दिनों से जारी खेजड़ी बचाओ आंदोलन में सरकार ने बड़ी जीत दी है. मंत्री केके बिश्नोई के आश्वासन के बाद अनशन टूटा, लेकिन कानून बनने तक धरना जारी रहेगा. जानें क्या है पूरा मामला.

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पानी पीकर महिलाओं ने तोड़ा अनशन.
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान के राज्य वृक्ष 'खेजड़ी' को बचाने के लिए बीकानेर कलेक्ट्रेट पर चल रहा महापड़ाव गुरुवार देर रात एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचा. राज्य सरकार द्वारा जोधपुर और बीकानेर संभाग में खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिखित आश्वासन के बाद पर्यावरण प्रेमियों और संतों ने अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया.

मंत्री का मंच से ऐलान- इसी सत्र में आएगा कठोर कानून

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आंदोलन के चौथे दिन सरकार के प्रतिनिधि के रूप में उद्योग राज्य मंत्री केके बिश्नोई महापड़ाव स्थल पहुंचे. उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार पर्यावरण प्रेमियों की भावनाओं का सम्मान करती है. अब जोधपुर और बीकानेर संभाग में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है. मंत्री ने भरोसा दिलाया कि इसी विधानसभा सत्र में खेजड़ी संरक्षण के लिए एक कठोर कानून लाया जाएगा.

लोकसभा से विधानसभा तक गूंजी 'खेजड़ी' की पुकार

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यह आंदोलन अब केवल बीकानेर तक सीमित नहीं रहा. नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने देश की सबसे बड़ी पंचायत 'लोकसभा' में खेजड़ी बचाने के पोस्टर लहराकर केंद्र का ध्यान खींचा. वहीं, राजस्थान विधानसभा में खाजूवाला विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी सदन में अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि अगस्त 2025 में संतों से किया गया वादा निभाया जाएगा और खेजड़ी संरक्षण के लिए जल्द ही वैधानिक प्रावधान किए जाएंगे.

जज्बे की जीत: 537 तक पहुंची अनशनकारियों की संख्या

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प्रचंड ठंड और गिरती सेहत के बावजूद आंदोलनकारियों का हौसला कम नहीं हुआ. अनशन करने वालों की संख्या चौथे दिन 480 से बढ़कर 537 हो गई. हालांकि, संघर्ष की कीमत भी चुकानी पड़ी. 80 से ज्यादा लोगों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बिश्नोई धर्मशाला में बने अस्थाई अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि 9 गंभीर अनशनकारियों को पीबीएम अस्पताल रेफर किया गया.

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आगे क्या? धरना अभी खत्म नहीं हुआ है

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अनशन जरूर टूट गया है, लेकिन पर्यावरण प्रेमियों ने साफ कर दिया है कि जब तक कानून नहीं, तब तक घर वापसी नहीं होगी. कलेक्ट्रेट पर शांतिपूर्ण धरना तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार अपने वादे को कानूनी जामा नहीं पहना देती.

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